नकहरा में बाढ़ पर अफसर-विधायक के दावे हवा-हवाई, आंकड़ों में भारी विरोधाभास
1 min readनकहरा में बाढ़ पर अफसर-विधायक के दावे हवा-हवाई, आंकड़ों में भारी विरोधाभास
एडीएम बोले- नकहरा में 3500 आबादी प्रभावित, विधायक बोले- 9 मजरों में हजारों प्रभावित, 100 किट बांटकर ली वाहवाही, अधिकांश वंचित
करनैलगंज, गोंडा। तहसील करनैलगंज के बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायत नकहरा में प्रशासन और जनप्रतिनिधि के बयानों में भारी विरोधाभास सामने आया है। कागजों में 10 नावें और हजारों को राहत दिखाई जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विधायक द्वारा बुधवार को महज 100 लोगों को किट बांटना ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। अधिकांश बाढ़ पीड़ित अभी भी राहत किट से वंचित हैं और मायूस होकर मदद की बाट जोह रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी ने मंगलवार को नकहरा में प्रशासनिक अमले के साथ निरीक्षण के दौरान कहा था “ये नकहरा और इनके जो मजरे हैं, घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ने से पूरा गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है। कुछ नीचे बने घरों में पानी चला गया है। राहत के लिए राजस्व, पुलिस, मेडिकल टीम लगी है। ग्राम प्रधान स्वयं प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। तत्काल आज से लंच पैकेट और राशन किट वितरण शुरू करवा रहे हैं।” उन्होंने आबादी को लेकर कहा था-“नकहरा में लगभग 3500 की आबादी प्रभावित है, और कुल मिलाकर पूरे जिले में लगभग दस हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। साथ ही दावा किया था कि 9 से 10 नाव इस गांव के लिए लगा दी गई हैं।
वहीं उसके दूसरे दिन बुधवार को विधायक अजय कुमार सिंह ने नाव से निरीक्षण कर कहा -“नकहरा गांव के नौ मजरों में बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। गांव में इस समय 10 नावें चलाई जा रही हैं।” उन्होंने फसल नुकसान का आकलन कराकर क्षतिपूर्ति और सोलर लाइट लगवाने का आश्वासन दिया। कांग्रेस के पिकनिक वाले आरोप पर कहा – “जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।”
खबर का सबसे बड़ा विरोधाभास और जमीनी सच यह है कि आबादी के आंकड़े पर विरोधाभास है। एडीएम एक दिन पहले 3500 आबादी प्रभावित बता रहे हैं, दूसरे दिन विधायक 9 मजरों में हजारों लोग प्रभावित बता रहे हैं। आखिर आंकड़ा 3500 है या हजारों?
राहत के नाम पर खानापूर्ति
एडीएम ने मंगलवार को कहा कि आज से किट वितरण शुरू होगा, विधायक ने बुधवार को 100 लोगों को किट बांटकर फोटो खिंचवा ली। गांव में हजारों प्रभावित हैं और 100 किट बांटना ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। अधिकांश बाढ़ पीड़ित अभी भी राहत किट से वंचित हैं और मायूस होकर मदद की बाट जोह रहे हैं।
नावों की हकीकत
दोनों ने 9- 10 नावों का दावा किया, लेकिन मौके पर मौजूद ग्रामीणों के अनुसार 3-4 नाव ही चलती दिख रही हैं, जिससे हजारों लोगों का आवागमन मुश्किल हो रहा है।

