March 25, 2026

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चौरासी कोसी परिक्रमा पथ के निर्माण की आड़ में पेड़ों की अवैध कटान जारी, जिम्मेदार मौन”

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मिल्कीपुर, अयोध्या।
84 कोसी परिक्रमा पथ के नाम पर इन दिनों क्षेत्र में हरियाली की “विदाई यात्रा” निकलती दिखाई दे रही है। हरे-भरे, छायादार और वर्षों पुराने पेड़ों पर कुल्हाड़ी कुछ इस तेजी से चल रही है मानो विकास की गाड़ी को सबसे बड़ा खतरा इन्हीं से हो।
बीकापुर-इनायतनगर-रेवतीगंज संपर्क मार्ग के किनारे लगे आम, महुआ, शीशम और अर्जुन जैसे पेड़, जो कभी राहगीरों को राहत देते थे, अब खुद ही राहत की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोग हैरान हैं कि जिस परिक्रमा पथ का हवाला देकर यह कटान हो रही है, वह कई जगहों पर इन पेड़ों के आसपास से गुजरता तक नहीं दिखता। फिर भी पेड़ों की “बलि” जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि परिक्रमा पथ तो अपनी जगह है, लेकिन कुल्हाड़ी अपनी मर्जी से चल रही है। खासकर ग्राम पंचायत घुरेहटा के राम गोबिंद के पुरवा से रुइहन पुरवा मोड़ तक तो ऐसा लग रहा है जैसे पेड़ों के खिलाफ कोई विशेष अभियान चलाया जा रहा हो।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जहां-जहां पेड़ कट रहे हैं, वहां से परिक्रमा पथ सैकड़ों मीटर दूर है। यानी रास्ता कहीं और, और सफाया कहीं और! ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है, कि क्या पेड़ ही विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं।
उधर जिम्मेदार विभागों की भूमिका भी कम रोचक नहीं है। एक ओर वन विभाग कह रहा है कि जो सर्वे मिला है, उसी के अनुसार काम हो रहा है, इसलिए कटान रोकी नहीं जा सकती। वहीं प्रशासन का कहना है कि अगर सीमा से बाहर कटान हुई है तो जांच होगी। यानी मामला फिलहाल देखेंगे-करेंगे के भरोसे पर टिका हुआ है।
पर्यावरण प्रेमी श्रवणजीत ने अयोध्या कमिश्नर से शिकायत दर्ज कराई है वहीं और घुरेहटा के क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा कर अवैध कटान रोकने की मांग की है। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अवैध कटान पर तुरंत रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन अगर हरियाली ही खत्म हो गई, तो फिर इस विकास का आनंद कौन लेगा। हालांकि मिल्कीपुर विधायक चन्द्रभानु पासवान ने आश्वासन दिया है कि हम जिलाधिकारी से मिलकर मामले से अवगत कराएंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन की नींद पहले खुलती है या इलाके के आखिरी पेड़ की सांस बंद होती है।

दिनेश कुमार

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