May 8, 2026

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गोलीबारी मामले में आरोपित कुशल दुबे को जमानत, न्यायालय ने दी बड़ी राहत

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गोलीबारी मामले में आरोपित कुशल दुबे को जमानत, न्यायालय ने दी बड़ी राहत

बचाव पक्ष ने एफआईआर और घटना पर उठाए सवाल, पुराने रंजिशन मुकदमे का भी किया जिक्र

अयोध्या।
इनायतनगर थाना क्षेत्र के बहुचर्चित गोलीबारी मामले में आरोपित कुशल दुबे उर्फ अभय दुबे को आखिरकार न्यायालय से बड़ी राहत मिल गई है। अपर जिला जज तृतीय की अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए उसे रिहा किए जाने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता वाइवी मिश्रा एवं विकासचंद्र पांडेय ने न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण तर्क प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने कहा कि कथित घटना के बाद घायल व्यक्ति को पहले लगभग 60 किलोमीटर दूर दर्शननगर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया और वहां से उसे करीब 150 किलोमीटर दूर लखनऊ रेफर किया गया। इतना लंबा इलाज और सफर तय होने के बावजूद प्राथमिकी 17 फरवरी की भोर में दर्ज कराई गई, जिससे घटना की सत्यता और समय को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि एक कथित कूटर्चित प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस के सहयोग से मुकदमा दर्ज कराया गया है। अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और आरोप केवल दबाव बनाने की नीयत से लगाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान वर्ष 2009 के पुराने विवाद का भी उल्लेख किया गया। बचाव पक्ष के अनुसार कुशल दुबे के पिता उमाशंकर दुबे और उनके अंगरक्षक की हत्या वर्ष 2009 में हुई थी, जिसमें वर्तमान वादी मुकदमा और उसके सहयोगियों का नाम सामने आया था। वह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। अधिवक्ताओं का कहना था कि उसी मुकदमे में साक्ष्य को प्रभावित करने और दबाव बनाने के उद्देश्य से कुशल दुबे सहित तीन लोगों को झूठे मामले में फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने वादी संजय सिंह के आपराधिक इतिहास का भी उल्लेख करते हुए न्यायालय को बताया कि उसके खिलाफ करीब 23 मुकदमे दर्ज हैं तथा वह हिस्ट्रीशीटर है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी कुशल दुबे की जमानत मंजूर कर ली है।
मामले में न्यायालय के इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जबकि क्षेत्रीय लोगों की नजर अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।

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