May 9, 2026

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समाज और संस्कृति की रक्षा का दायित्व शिक्षकों पर है :- शिव शंकर सिंह

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बांदा
टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी करने से मिलेगी मुक्ति: शिव शंकर सिंह
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष श्री शिव शंकर सिंह का बांदा आगमन: प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ हुई विशेष बैठक
बांदा: राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष माननीय शिव शंकर सिंह जी का दिनांक 8 मई को जनपद बांदा में प्रवास हुआ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बांदा के पदाधिकारियों द्वारा माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बांदा के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि माननीय प्रदेश अध्यक्ष जी के बांदा प्रवास पर चुनिंदा कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक जिला कार्यालय जरैली कोठी बांदा में आयोजित की गई। जिसमें चित्रकूट धाम मंडल के मंडल अध्यक्ष डॉ शिव प्रकाश सिंह मांडलिक मंत्री ऋषि रंजन देशपांडे एवं प्रदेश अध्यक्ष माननीय शिव शंकर सिंह जी का पाथेय प्राप्त हुआ। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने की।
माननीय प्रदेश अध्यक्ष श्री शिवशंकर सिंह जी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने पूर्व में ही शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं को प्रदेश स्तरीय संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर हल कराया है और आगे भी हल कराता रहेगा। उन्होंने बताया कि 2004 विशिष्ट बीटीसी के तहत नियुक्त होने वाले अध्यापकों के लिए पुरानी पेंशन का आदेश शीघ्र ही होने वाला है,उक्त के संबंध में समस्त कारवाइयां कराई जा चुकी हैं। टीईटी के संबंध में अवगत कराया कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा एनसीटीई के अधिकारियों एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी को एक साथ लेकर गहन विचार विमर्श कर इस सम्बन्ध में समस्त आवश्यक दस्तावेज तैयार कर एनसीटीई द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए है। जिसके क्रम में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी के संबंध में दाखिल रिव्यू को ओपन कोर्ट में सुनने का आदेश दिया गया है। शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में टीईटी से मुक्ति संबंधी कार्यवाही अभी तक सही दिशा में चल रही है आने वाले समय में निश्चित रूप से शिक्षकों के पक्ष में परिणाम प्राप्त होगा। पदाधिकारी को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल हमारी मांगे पूरी हो का नारा देने वाले बहुत सारे शिक्षक संगठन हैं। परंतु समाज और संस्कृति की रक्षा करने की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन नहीं है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का उदय ही शिक्षा, शिक्षक एवं छात्र के उत्थान के साथ साथ समाज और संस्कृति के रक्षा की जिम्मेदारी के लिए हुआ है। डॉक्टर, इंजीनियर या किसी अन्य पेशेवर व्यक्तियों के ऊपर समाज और संस्कृति के रक्षा की जिम्मेदारी नहीं है। हम सभी शिक्षकों पर ही संस्कृति और समाज की रक्षा की जिम्मेदारी है। चूंकि हम विद्यालयों में नौनिहालों के अंदर संस्कृति एवं समाज में रहने का गुण भरते हैं इसलिए समाज और संस्कृति के प्रति हम सब की अधिक जिम्मेदारी बनती है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महसन बांदा की कार्य प्रणाली की सराहना करते हुए संगठन के उत्थान के लिए कुछ प्रमुख मूल मंत्र पदाधिकारियों को बताए एवं अपनी अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए शैक्षिक महासंघ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रेरित किया।
बैठक में उपस्थित समस्त पदाधिकारियों से प्रदेश स्तरीय समस्याएं एकत्रित कर उनको शीघ्र निस्तारित कराने का आश्वासन प्रदेश अध्यक्ष महोदय द्वारा दिया गया।
बैठक को मंडल अध्यक्ष एवं मांडलिक मंत्री द्वारा भी संबोधित किया गया। जिला अध्यक्ष पंकज सिंह जी द्वारा माननीय प्रदेश अध्यक्ष एवं उपस्थित पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया।
अंत में प्रदेश अध्यक्ष जी को स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र भेंट कर बैठक के समापन की घोषणा की गई।
बैठक में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बांदा के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संचालन संयुक्त महामंत्री विनोद कुमार शिवहरे द्वारा किया गया।

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