जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरुण कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में नव चयनित पैरा लीगल वॉलिंटियर्स के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया आयोजन
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धौलपुर,
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार एडीआर परिसर में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अरुण कुमार अग्रवाल द्वारा नवचयनित 8 पैरा लीगल वॉलिंटियर्स के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला एवं सेशन न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरुण कुमार अग्रवाल ने सरस्वती मां के छवि चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई।
सर्वप्रथम एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में अध्यक्ष ने नवचयनित पैरा लीगल वॉलिटियर्स को नालसा, रालसा, व डालसा तीनों के बारे में विस्तृत रूप से बताया एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स को नालसा स्कीमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पीलवी को सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक रूप् एवं पूर्ण रूप से ईमानदारी के साथ वंचित लोगों की मदद करनी चाहिए कमजोर और वंचित लोगों को आवश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है उनको जागरुक करने की भी आवश्यकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पारिवारिक न्यायाधीश सुशील कुमार पाराशर ने बताया कि पीएलवी को समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करना चाहिए एवं कानूनी साक्षरता शिविरों में भी प्रचार-प्रसार करना चाहिए एवं शिविरों में उपस्थित लोगों को सरल विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने की कोशिश करनी चाहिए एवं उन्हें बुनियादी कानूनी जानकारी भी दी जानी चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशिष्ठ न्यायाधीश राकेश गोयल ने पीएलवी को बताया कि डकैती तब होती है जब कोई व्यक्ति हिंसा या धमकी देकर आपसे कोई चीज़ छीन लेता है, लेकिन हमेशा नहीं, सड़क पर या किसी सार्वजनिक स्थान पर। डकैती को लूटपाट भी कहा जाता है, और अगर आपको शारीरिक रूप से चोट नहीं पहुँची है, तब भी इसे हिंसक अपराध माना जाता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत सुरेश प्रकाश भट्ट ने स्थाई लोक अदालत के कार्यप्रणालियों के बारे में विस्तार से बताया जैसे स्थायी लोक अदालत में जनउपयोगी सेवाओं से संबंधित प्रकरण आते है इत्यादि।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सचिव रेखा यादव ने बताया कि पीएलवी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रीढ़ की हड्डी है, जहां पर प्राधिकरण नहीं पहुंच पाता है उस स्थान पर पीएलवी पहुंचकर कमजोर व गरीब तबकों के व्यक्तियों को वांछित सहायता उपलब्ध करवाते हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कमजोर तबके के व्यक्तियों तक सहायता कैसे उपलब्ध करवाई जाए एवं किन योजनाओं व कानूनों में उन्हें क्या अधिकार प्रदान किये गये हैं, इनसे अवगत कराना है साथ ही प्रशिक्षण के दौरान सचिव ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं, तस्करी और वाणिज्यिक यौन शोषण, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण, मानसिक रूप से बीमार और दिव्यांग, गरीबी उन्मूलन, आदिवासियों के संरक्षण, नशा उन्मूलन, वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित योजना व एसिड अटैक हमले के पीड़ितों के लिए विधिक सेवा योजनाओं एवं भारत के लोकपाल के अधिदेश और कार्यप्रणाली के बारे में, अनुसूचित जाति व जनजातियों के लिए विरूद्ध अस्पृश्यता और अत्याचार, बाल विवाह, मीडियेशन फॉर दी नेशन अभियान, आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 13 सितम्बर पॉश एक्ट व नालसा हेल्पलाईन नम्बर 15100 एवं नालसा व रालसा स्कीमों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई साथ ही जिले में ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 के उद्देश्य को प्रभावी रूप से लागू किए जाने के संबंध में मोबाइल न्यायालयों की कार्यप्रणाली, प्रकरण दायर करने की प्रक्रिया तथा उपलब्ध विधिक सहायता के बारे में भी विस्तार से बताया साथ ही पब्लिक यूटिलिटि सर्विस के बारे में भी विस्तार से बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट नीतू ने बताया कि बच्चों के अधिकारों एवं अदालत किशोरों को उनकी उम्र और विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित ध्यान, मार्गदर्शन और पुनर्वास प्रदान करने का प्रयास करती है, और आपराधिक न्याय प्रणाली की एक शाखा है जो नाबालिगों से जुड़े मुकदमों को देखती है।
ब्यूरो विजय शर्मा

