नेटवर्किंग कंपनियों पर उठ रहे सवाल, आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री से सावधान रहें लोग
1 min readलखनऊ
नेटवर्किंग कंपनियों की गतिविधियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी मिली है कि कई कंपनियाँ अपने सदस्यों को “आयुर्वेद सलाहकार” बताकर दवाएँ बेचने के लिए प्रेरित कर रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री और परामर्श केवल बी.ए.एम.एस. डिग्रीधारी चिकित्सक या रजिस्टर्ड वैद्य ही कर सकते हैं।
चिकित्सक चेतावनी दे रहे हैं कि ऐसे तथाकथित “सलाहकारों” से दवा खरीदना और बिना परामर्श के सेवन करना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कई बार लोग पैसे खर्च कर दवा खरीदते हैं, लेकिन फायदा न मिलने पर आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह से नुकसान झेलते हैं।
जानकारी यह भी है कि कुछ कंपनियाँ बेरोज़गार युवाओं को टूर पैकेज और नेटवर्किंग के सपनों में उलझाकर दवा बेचने की ओर धकेल रही हैं। जब शिकायत होती है तो कंपनियों के तथाकथित लीडर और मैनेजमेंट न तो फोन उठाते हैं और न ही कोई जवाब देते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि –
किसी भी दवा का उपयोग केवल पंजीकृत डॉक्टर या वैद्य की राय पर ही करें।
यदि किसी दवा से नुकसान हुआ है तो उसकी चिकित्सीय जाँच कराएँ और रिपोर्ट को सार्वजनिक करें ताकि समाज को चेताया जा सके।
अपने शरीर को प्रयोगशाला न बनाएँ और नेटवर्किंग कंपनियों के झाँसे में न आएँ।
कानून के जानकारों का कहना है कि यदि कोई नेटवर्किंग कंपनी या उसका एजेंट झूठे दावे करके दवा बेचता है, तो यह न सिर्फ Drugs and Cosmetics Act, 1940 और Drugs & Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954 का उल्लंघन है, बल्कि आपराधिक कृत्य भी है।
👉 नए दंड संहिता कानून भारतीय दंड संहिता (BNS-2023) के अनुसार –
धारा 318 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति या सेवा लेना) लागू हो सकती है।
धारा 415 (जनता को धोखे में डालकर नुकसान पहुँचाना) भी ऐसे मामलों में लागू होती है।
दवा से गंभीर नुकसान होने पर धारा 120 (लापरवाही से जीवन को जोखिम में डालना) और अन्य धाराएँ भी लग सकती हैं।
समाज के बुद्धिजीवियों का कहना है कि जागरूकता ही बचाव है। आमजन को चाहिए कि किसी भी कंपनी के बहकावे में न आकर सिर्फ प्रमाणित चिकित्सक की देखरेख में ही दवा का सेवन करें।
अवध न्यूज स्पीड एजेंसी

