सरकारी मनमानी पर कानून का शिकंजा, अब जवाबदेही से बचना आसान नहीं
1 min readअयोध्या

सरकारी मनमानी पर कानून का शिकंजा, अब जवाबदेही से बचना आसान नहीं!
सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर अखंड हिंदू राष्ट्र मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाराम तिवारी ने आम जनता से अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक होने की अपील की है।
श्री तिवारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 218 का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और कथित प्रशासनिक मनमानी के मामलों में नागरिकों को कानून की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों के लिए प्रभावी ढंग से आवाज उठा सकें।
सबसे महत्वपूर्ण बात—कानून से ऊपर कोई नहीं और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।
बीएनएसएस की धारा 218 के तहत, आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े कुछ कथित अपराधों में अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी आवश्यक होती है। कानून में ऐसी मंजूरी पर निर्णय लेने के लिए 120 दिनों की समय-सीमा निर्धारित है। निर्धारित अवधि में निर्णय नहीं होने पर कानून के अनुसार मंजूरी दी गई मानी जा सकती है। हालांकि, यह प्रावधान हर शिकायत या एफआईआर पर स्वतः लागू नहीं होता।
यदि किसी नागरिक की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो वह संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
इस पूरे विषय में माननीय सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। कानून का शासन, निष्पक्ष जांच और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा न्याय व्यवस्था के प्रमुख आधार हैं।
गंगाराम तिवारी का संदेश साफ है—अपने अधिकारों को जानिए, शिकायतों के प्रमाण सुरक्षित रखिए और अन्याय के खिलाफ कानूनी तरीके से आवाज उठाइए।
क्योंकि जागरूक नागरिक ही जवाबदेह प्रशासन की मजबूत नींव हैं और न्यायपूर्ण व्यवस्था में हर शिकायत की निष्पक्ष जांच तथा दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
