एड्स नियंत्रण कर्मियों का आंदोलन का ऐलान, लंबित मांगों पर विभागीय उदासीनता से बढ़ा आक्रोश
1 min readरामनगरी/अयोध्या
जिला अस्पताल एड्स नियंत्रण कर्मचारी संघ ने लंबित मांगों के समाधान में कथित देरी को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
संघ का कहना है कि लंबे समय से कर्मचारियों की समस्याएं शासन और विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में होने के बावजूद प्रभावी समाधान नहीं किया गया। इसी के चलते कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
संघ अध्यक्ष पंकज कुमार श्रीवास्तव और महामंत्री नरेंद्र कुमार की ओर से 28 सितंबर को जारी पत्र के मुताबिक 5 से 11 अक्टूबर तक कर्मचारी कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इसके बाद 12 से 14 अक्टूबर तक चिकित्सा संस्थानों, जिला चिकित्सालयों, सीएचसी और पीएचसी में दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
आंदोलन के तीसरे चरण में 15 अक्टूबर को लखनऊ के ईको गार्डन में विशाल धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। संघ ने चेतावनी दी है कि इसके बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो 16 अक्टूबर से भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
इतना ही नहीं, एचआईवी/एड्स से संबंधित सेवाएं स्थगित करने की भी चेतावनी दी गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण सेवाओं के कर्मचारियों की मांगों के समाधान में आखिर इतनी देरी क्यों हुई?
यदि कर्मचारियों की समस्याएं पहले ही गंभीरता से सुनी जातीं तो आंदोलन की नौबत क्यों आती?
विभागीय अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि लंबित मांगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की गई।
एचआईवी/एड्स सेवाएं सीधे मरीजों और जरूरतमंदों से जुड़ी हैं। ऐसे में आंदोलन के कारण सेवाएं प्रभावित होती हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
शासन और विभागीय अधिकारियों को तत्काल वार्ता कर समाधान निकालना चाहिए, ताकि कर्मचारियों का आंदोलन स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी न पड़े।

