योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों की खुली पोल: दोस्तपुर में भू-माफियाओं के हौसले बुलंद, पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
1 min read दोस्तपुर/सुलतानपुर:
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भले ही अपराधियों और भू-माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस की कार्यप्रणाली इन दावों की धज्जियां उड़ाती नजर आ रही है। ताजा मामला दोस्तपुर थाना क्षेत्र के बीबीपुर रेहटी गांव से जुड़ा है, जहां एक पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित राजेश यादव के सेहन और दरवाजे के ठीक सामने आबादी गाटा संख्या 233 की जमीन स्थित है। आरोप है कि कुछ विपक्षीगण इस जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस अवैध कब्जे के विरोध में पीड़ित ने दो दिन पूर्व थाने पहुंचकर लिखित प्रार्थना पत्र दिया था।
पीड़ित का आरोप है कि थाने से उसे दोबारा बुलाया गया, जहां पुलिस ने अजीबोगरीब रुख अपनाते हुए कहा कि “उस जमीन पर कोई हस्तक्षेप मत करो, तुम्हारी जमीन पर बाउंड्री वॉल बनाई जाएगी।” इस मनमाने रवैये के बाद से पीड़ित न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, जबकि इस जमीन की घरौनी भी पहले ही दर्ज हो चुकी है।
इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जब यह पूरा मामला राजस्व विभाग और सिविल न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का है, तो स्थानीय पुलिस प्रशासन इसमें बेवजह दखल क्यों दे रहा है?
जिस विवाद पर फैसला देने का अधिकार केवल सिविल न्यायालय को है, उस अधिकार का हनन करते हुए थाना प्रभारी दोस्तपुर किस आधार पर निर्णय सुना रहे हैं?
क्या थाने की ऐसी कार्यप्रणाली से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को पलीता नहीं लग रहा है?
एक तरफ जहां सरकार पीड़ित की मदद और त्वरित न्याय का दावा करती है, वहीं दोस्तपुर थाने में प्रार्थना पत्र देने वाले पीड़ित को राहत मिलने के बजाय मानसिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं। A.K.tirpathi

