एक दिन में उठीं 6 अर्थियां, रो पड़ा धौलपुर, दो हादसों ने उजाड़ दिए परिवार, 29 साल पुराना दर्द फिर हुआ ताजा,
1 min readधौलपुर,
धौलपुर में बुधवार को एक साथ छह अर्थियां उठीं तो पूरा शहर गम में डूब गया। चंबल नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में एक के बाद एक छह शवों का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों की चीख-पुकार और सिसकियों के बीच अंतिम विदाई का यह दृश्य जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। इस घटना ने शहरवासियों को करीब 29 साल पुराने उस हादसे की याद भी दिला दी, जब एक साथ छह लोगों की मौत हुई थी।
दरअसल, मंगलवार को जिले में हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत हो गई थी। उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए जा रहे पुरानी सब्जी मंडी क्षेत्र के त्रिवेदी परिवार की कार डंपर से टकरा गई। हादसे में सुनील त्रिवेदी की पत्नी सोमा (65), बेटे अंकुर (42) और बहू अर्चना (40) की मौत हो गई। बुधवार को तीनों का चंबल मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार पर ऐसा संकट आया कि घर की दोनों बहुएं नहीं रहीं। पिता और भाइयों को संभालने के लिए बेटियां भी पहुंचीं।
वहीं धौलपुर-भरतपुर हाईवे पर हुए दूसरे हादसे में सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन, उनके भतीजे एवं तेल व्यवसायी विजय जैन और विजय के बेटे आदी जैन की मौत हो गई। तीनों के शव घर पहुंचने पर कोहराम मच गया। अंतिम संस्कार के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब मयंक ने कांपते हाथों से अपने पिता राजकुमार जैन को मुखाग्नि दी।
29 साल पुराना दर्द फिर हुआ ताजा
धौलपुर में 12 अक्टूबर 1997 को जयपुर के पास टाटा सूमो पलटने से हनुमान तिराहे पर रहने वाले तिवारी परिवार के छह लोगों की मौत हुई थी। तब भी शहर ने एक साथ छह अर्थियां उठते देखी थीं। करीब तीन दशक बाद मंगलवार के हादसों ने उस दर्दनाक घटना की याद फिर ताजा कर दी।
दो हादसों में छह जिंदगियां खत्म हुईं और बुधवार को चंबल किनारे छह चिताएं जलीं। धौलपुर ने एक ही दिन में छह अपनों को अंतिम विदाई दी और पूरा शहर शोक में डूब गया।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो


