विभिन्न विद्यालयों में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे के अंतर्गत विधिक जागरुकता शिविर आयोजित कर बच्चों को यौन अपराधों के प्रति किया जागरुक
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धौलपुर,
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा राजस्थान राज्य में स्कूली छात्रों के लिए ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे नामक एक विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम के क्रम में सचिव रेखा यादव एवं सभी न्यायिक अधिकारीगणों द्वारा विभिन्न विद्यालयों में ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे के अंतर्गत विषय शोषण के खिलाफ आवाज उठाएँ, अपने शरीर और मन की रक्षा करें गुड टच और बैड टच के बीच का फर्क समझें और सुरक्षित रहें के विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें न्यायिक अधिकारीगणों ने विद्यालय में बच्चों को यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 पॉक्सो एक्ट 2012 के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न, यौन हमला, गंभीर यौन हमला, अश्लील प्रदर्शन, ऑनलाइन शोषण तथा बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री जैसे अपराध दंडनीय हैं। इसमें धारा 7 एवं 8 के अंतर्गत यदि किसी बच्चे के गुप्तांगों को यौन उद्देश्य से छुआ जाता है या उसके साथ अनुचित शारीरिक स्पर्श किया जाता है, तो यह दंडनीय अपराध है साथ ही धारा 9 एवं 10 के अंतर्गत यदि अपराध परिवार के सदस्य, शिक्षक, अभिभावक, संरक्षक अथवा विश्वास की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाता है, तो इसे अधिक गंभीर अपराध माना जाता है साथ ही धारा 11 एवं 12 के अनुसार गंदी बातें करना, अश्लील इशारे करना, अश्लील फोटो या वीडियो मांगना, मोबाइल अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से यौन उत्पीड़न करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही किशोर न्याय बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2015 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून उन बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करता है जिन्हें देखभाल, संरक्षण, शिक्षा, उपचार या पुनर्वास की आवश्यकता है। इसके अंतर्गत अनाथ, परित्यक्त, बेघर, शोषित, बाल श्रमिक, बाल विवाह से प्रभावित तथा जोखिम ग्रस्त बच्चों को संरक्षण प्रदान किया जाता है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी देते हुए बताया कि यह नई आपराधिक संहिता बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने पर बल देती है। बच्चों के विरुद्ध अपराध, शारीरिक हिंसा, धमकी, पीछा करना, अश्लील कृत्य, मानव तस्करी तथा डिजिटल माध्यम से किए जाने वाले अपराधों के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। बच्चों को गुड टच और बैड टच के बीच का अंतर समझाया एवं बच्चों को बताया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए, अनुचित तरीके से छुए, डराए-धमकाए या गलत बात छिपाने के लिए कहे, तो वे तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक, अभिभावक, परामर्शदाता, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100, 112, महिला हेल्पलाइन नंबर 181, नालसा टोल फ्री नंबर 15100 पर संपर्क करें साथ ही स्कूली बच्चों को कोर्ट वाली दीदी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर आप कोर्ट वाली दीदी पेटिका में अपनी एप्लीकेशन भेज सकते हो जिसका निस्तारण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो

