संघर्ष, संस्कार और स्वाभिमान की मिसाल शेवराबाई भोसले का निधन, नायगांव में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
1 min readसंघर्ष, संस्कार और स्वाभिमान की मिसाल शेवराबाई भोसले का निधन, नायगांव में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी सहित अनेक गणमान्यों से सम्मानित आदर्श माता ने 95 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
पुणे |
पुणे जिले के हवेली तहसील स्थित नायगांव की निवासी तथा आदिवासी पारधी समाज की प्रेरणास्रोत एवं आदर्श माता शेवराबाई ज्ञानदेव भोसले का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सोमवार, 13 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से पारधी समाज सहित सामाजिक, साहित्यिक और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। नायगांव में उनका अंतिम संस्कार नम आंखों और भावपूर्ण माहौल में किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजबंधु, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
शेवराबाई भोसले का संपूर्ण जीवन संघर्ष, त्याग, स्वाभिमान और शिक्षा के मूल्यों को समर्पित रहा। अत्यंत विपरीत परिस्थितियों और गरीबी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को उच्च संस्कार, शिक्षा और समाजसेवा की प्रेरणा दी। उनके इन्हीं संस्कारों के कारण उनके पुत्रों ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। समाजसेवक नामदेव भोसले ने पारधी समाज पर लगे अपराधीकरण के कलंक को मिटाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किया, साहित्यकार भास्कर भोसले ने साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाई तथा पत्रकार सुनील भोसले ने शोषितों और वंचितों की आवाज बुलंद की।
शेवराबाई भोसले के सामाजिक योगदान को देश-विदेश की संस्थाओं ने 29 प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया। वर्ष 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया, जबकि वर्ष 2021 में तत्कालीन महाराष्ट्र राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने राजभवन में उनका विशेष सत्कार किया।
अंतिम विदाई के अवसर पर पूर्व सरपंच रघुनाथ अण्णा चौधरी, डॉ. मधुकर आव्हाड, उद्योगपति जयवंत शितोळे-पाटील, सरपंच संभाजी खडके, विकास चौधरी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और पारधी समाज के अनेक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
शेवराबाई भोसले अपने पीछे पुत्र तुकाराम, भास्कर, महादेव, नामदेव, सुनील और अनिल सहित बेटियों, बहुओं, पोते-पोतियों और नाती-पोतों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनका संघर्षमय जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।




