भूख-प्यास से तड़पते गौवंशों पर उठे गंभीर सवाल,72 घंटे बाद भी गौ आश्रय स्थल में नहीं पहुंचा भूसा
1 min readनिरीक्षण में 35 कुंतल भूसा पहुंचाने का दावा, फिर चारा गया कहां?
भूख-प्यास से तड़पते गौवंशों पर उठे गंभीर सवाल
बीकापुर/ अयोध्या
गौवंशों की देखभाल और उनके लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
पत्रकारों की पड़ताल में सामने आया कि कथित तौर पर 72 घंटे पहले खंड विकास अधिकारी द्वारा गौ आश्रय स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया गया था।
निरीक्षण के दौरान गौवंशों के लिए 35 कुंतल भूसा उपलब्ध कराने की बात कही गई थी “इसके बावजूद खबर लिखे जाने तक गौ आश्रय स्थल पर भूसा नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि स्थलीय निरीक्षण के कुछ ही घंटे बाद गौवंशों के लिए उपलब्ध चारा खत्म हो गया आरोप है कि इसके बाद से कई गौवंश भूख और प्यास से परेशान हैं।
जिसकी जानकारी कल ही सेक्रेटरी व ग्राम प्रधान को गौ आश्रय स्थल के कर्मियों के द्वारा दी गई
यदि वास्तव में 35 कुंतल भूसा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी तो वह भूसा आखिर गया कहां?
क्या वह गौ आश्रय स्थल तक पहुंचा ही नहीं, या फिर कागजों में व्यवस्था दिखाकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई?
यह मामला महज चारे की कमी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी का भी है।
जब अधिकारी स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कहते हैं, तो उसके बाद गौवंशों तक चारा क्यों नहीं पहुंचा—इसका स्पष्ट जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए।
अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि वह पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर मामला कागजी खानापूर्ति तक सीमित रह जाएगा।
यदि 35 कुंतल भूसा भेजे जाने का दावा किया गया था, तो उसकी खरीद, उठान, परिवहन और गौ आश्रय स्थल पर प्राप्ति का रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
गौवंशों के नाम पर सरकारी व्यवस्था होने के बावजूद यदि उन्हें भूख-प्यास से जूझना पड़ रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
जिला प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।


