घाघरा का कहर, तरबगंज-कर्नलगंज में बढ़ा कटान, 1 बीघा जमीन और 2 मकान नदी में विलीन
1 min readघाघरा का कहर: तरबगंज-कर्नलगंज में बढ़ा कटान, 1 बीघा जमीन और 2 मकान नदी में विलीन
2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बढ़ा घाघरा का जलस्तर, ग्रामीणों को पलायन की नौबत
गोण्डा।

घाघरा नदी में जलस्तर बढ़ने के साथ ही तटीय इलाकों में कटान ने रफ्तार पकड़ ली है। कर्नलगंज और तरबगंज क्षेत्र के निचले इलाकों में नदी ने कई मकानों और कृषि भूमि को अपने आगोश में ले लिया है। इससे ग्रामीणों के सामने आशियाना बचाने और सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
नदी में समाया पक्का मकान, फूस का घर भी बहा
तरबगंज तहसील के नवाबगंज स्थित दत्तनगर मांझा गांव में सोमवार रात करीब 1 बजे दिनेश यादव का तीन कमरों का पक्का मकान घाघरा की कटान में पूरी तरह बह गया। वहीं मंगलवार सुबह करीब 7 बजे गांव के ही एक अन्य व्यक्ति का फूस का मकान भी नदी में समा गया। अब तक गांव की 1 बीघा से अधिक कृषि भूमि भी कटान की भेंट चढ़ चुकी है। कई और फूस के मकान नदी के किनारे खतरे की जद में आ गए हैं। इनमें रहने वाले परिवार अब सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
2.53 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया
मंगलवार सुबह 9:30 बजे घाघरा नदी में कुल 2 लाख 53 हजार 666 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसमें गिरजा बैराज से 1,17,776 क्यूसेक, शारदा बैराज से 1,31,337 क्यूसेक और सरयू बैराज से 4,553 क्यूसेक पानी शामिल है। इसके बाद नदी का जलस्तर देर शाम तक और बढ़ने की संभावना जताई गई है। फिलहाल एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 28 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।
अब तक नहीं मिली कोई सरकारी मदद
स्थानीय निवासी दिनेश यादव ने बताया कि पिछले वर्ष जलस्तर कम होने के बावजूद कटान हो रही थी, लेकिन इस बार जलस्तर बढ़ने के बाद कटान पहले से अधिक तेज है। उनका आरोप है कि अब तक किसी भी प्रभावित परिवार को सरकारी सहायता नहीं मिली है और न ही कोई अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा लेने पहुंचा है।
प्रशासन का दावा: आकलन जारी
गोण्डा के जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि कटान से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। जिन परिवारों को नुकसान हुआ है, उनका आकलन कर शासन की ओर से नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कई और घर खतरे में
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान की रफ्तार नहीं थमी तो और कई घर नदी में समा सकते हैं। लोग अपने घर का सामान बांधकर पलायन की तैयारी में जुट गए हैं।
