आजाद वर्मा हत्याकांड का तथ्य और सच, बना चर्चा
1 min readसुल्तानपुर।
आजाद वर्मा हत्याकांड का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया ट्रायल के आधार पर किसी को दोषी नहीं बनाया जा सकता है। ग्राउंड जीरो पर जाकर जब हत्या की तफ़सीस की गई तो बहुत सारी जानकारी और छुपे तथ्य सामने आए इनको समझे बिना किसी को दोषी माना नहीं जा सकता..
इन तथ्यों को जान और समझकर आप खुद निर्णय ले सकते हैं की बहुचर्चित आजाद हत्याकांड का सच और राजनीतिक गिद्ध….
सन 2024 में आजाद वर्मा, अभिषेक वर्मा, आदित्य वर्मा, पवन वर्मा, अमन ने मिलकर राज नारायण पाण्डेय उर्फ अंकू पाण्डेय के ऊपर जानलेवा हमला किया था और मरणासन्न अवस्था में छोड़ दिया था। जिसकी प्राथमिकी 05 नवंबर 2024 को (428/24) गोसाईं गंज थाने में दर्ज है। आजाद वर्मा आदि के हमले में राजनारायण
जिंदा तो बच गये किन्तु अपनी एक आंख गवां बैठे। जिनका आज भी इलाज चल रहा है। आजाद वर्मा जेल भी गया जेल से बाहर आने पर और भी आक्रामक हो गया कई बार राज नारायण के परिवार पर मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव भी बनाया। (ऐसा ही दबाव जादूगर भी बनाए थे जिसमें इन्हें आजीवन कारावास हुआ था।)
28 जून 2026 को आजाद वर्मा पर जानलेवा हमला हुआ, जिसके बाद लखनऊ में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना अत्यंत दुखद और अमानवीय है। इस हत्या की घोर निंदा होनी चाहिए।
मृत्यु से पूर्व आजाद वर्मा ने अपने बयान में सूरज पाण्डेय, अशोक, अन्नू और राज नारायण पाण्डेय का नाम शामिल है। लेकिन स्थानीय सूत्रों से कुछ अलग ही सत्य सामने आ रही हैं…..
कि घटना के समय………. सूरज उत्तर प्रदेश से बाहर था। अशोक और अन्नू पाण्डेय सुल्तानपुर में स्थित (विनोवापुरी) आवास पर थे।
राजनारायण पाण्डेय की शारीरिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे गोली मार के भाग सकें।
- ग्रामीणों ने नाम सार्वजनिक करने की शर्त पर बताया कि पुरानी रंजिश के कारण मरते वक्त ये नाम लेने के लिए दबाव बनाए गए है। लोगों को फ़साने के लिए सारी घेराबंदी की जा रही है। आजाद के पिता को सब पता है कि हत्या कौन किया है। उनके करीबी ही ले गए। मुकदमे में सुलह नहीं होने पर पांडेय के परिवार को फ़साने और दबाव बनाने के लिए यह षडयंत्र रचा गया है। पुलिस जांच करेगी तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
- आजाद वर्मा के पिता का कहना है कि “उनको मारने वाला हमारा ही सगा संबंधी है। दो आदमी हैं उनको ले जाने वाले।”
- आजाद को ले जाने वाले दो सगे संबंधी कौन है?
- मृतक आजाद के पिता उन दो सगे संबंधी का नाम क्यों नहीं सार्वजनिक किया?
क्योंकि दाल में कुछ काला है….. - मृतक ने बयान में नाम लिया है, इसलिए पुलिस ने सूरज, सत्यम और रूपम को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस की निष्पक्ष जांच के बाद ही हत्या का राज खुल पाएगा।
पुलिस को निम्न तथ्यों को ध्यान रखना होगा….
1.मृतक आजाद के पिता के बयान में जिन दो करीबी का जिक्र हुआ है। उनका नाम बताए?
उनसे पूछताछ हो…
2.सभी आरोपी के लोकेशन और वीडियो फुटेज की जांच की जाय?
- गवाहों, आरोपी, मृतक के पिता से अच्छी तरह पूछताछ और क्रास चेकिंग की जाय।
क्योंकि……
भारतीय न्याय प्रणाली का सिद्धांत है कि “सौ अपराधी भले ही छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष को सजा नहीं मिलनी चाहिए”। वास्तव में यह वाक्यांश सीधे संविधान में नहीं लिखा गया है, जबकि इसे हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता) का एक अनिवार्य हिस्सा माना है।

