June 18, 2026

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पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने फूंका बिगुल

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बांदा

टीईटी लागू होने के पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर अब जबरन टीईटी अनिवार्यता थोपने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बांदा ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एवं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के आवाहन पर जिला मुख्यालय जिलाधिकारी कार्यालय में एकत्र होकर माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी बांदा को सौंपा।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 एवं पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से देश के लगभग 30 लाख शिक्षकों में गहरी चिंता, पीड़ा एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त है। इन सभी शिक्षकों का भविष्य अंधकार में है। भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का यह स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम, अधिसूचना अथवा नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है ना कि पूर्व की तिथि से। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों तथा अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता तथा विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सदैव शिक्षक शिक्षा और समाज के हितों को लेकर के काम करता है। वर्तमान समय में शिक्षकों पर टीईटी थोप कर एक गंभीर समस्या उत्पन्न की गई है इसके निराकरण हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने निराकरण होने तक आंदोलन की रणनीति बनाई है। आंदोलन के प्रथम चरण में देशभर के समस्त जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करते हुए माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं संबंधित प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा जा रहा है। तत्पश्चात यदि मांगे पूरी नहीं होती है तो राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा सड़क से लेकर सदन तक भरने का काम किया जाएगा परंतु किसी भी शिक्षक की नौकरी पर आँच नहीं आने दी जाएगी ।
आंदोलन के प्रथम चरण के क्रम में आज 18 जून 2026 को दोपहर 3:30 बजे जिलाधिकारी कार्यालय पर सैकड़ो शिक्षकों की उपस्थिति में माननीय प्रधानमंत्री,केंद्रीय शिक्षा मंत्री जी एवं उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से भेज कर यह मांग की गई है कि भारत सरकार संवेदनशीलता दूरदर्शिता एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का परिचय देते हुए संसद में उपयुक्त विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर शिक्षकों को स्थाई राहत प्रदान करे। सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस एवं सुरक्षा की स्थिति का तत्काल निराकरण करे।
ज्ञापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के समस्त जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों सहित सैकड़ो शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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