May 23, 2026

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रक्तदान से बची गर्भवती महिला और जुड़वा बच्चों की जिन्दगी, इंसानियत ने पेश की मिसाल

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रक्तदान से इंसानियत फिर मुस्कुराई।

बांदा

रक्तदान से बची गर्भवती महिला और जुड़वा बच्चों की जिन्दगी, इंसानियत ने फिर पेश की मिसाल।

गरीब परिवार को मिला सहारा, रत्नेश गुप्ता और शुभम धुरिया ने निभाया मानवता का सबसे बड़ा धर्म।

डिलीवरी से पहले खून की कमी से जूझ रही महिला को मिला जीवनदान, रक्तदाताओं ने बचाई खुशियां।

जब जरूरत पड़ी खून की, तब आगे आए युवा। रक्तदान ने मां और जुड़वा बच्चों को दी नई जिन्दगी।

बिजली खेड़ा निवासी श्रीमती गुड़िया नाम की गरीब गर्भवती महिला जिला अस्पताल बाँदा में भर्ती थी। श्रीमती गुड़िया के पति श्री दुर्गेश अपनी पत्नी के शरीर में खून की भारी कमी के कारण चिन्तित थे एवं डिलीवरी का समय भी बेहद नजदीक था और डॉक्टरों ने तुरन्त A पॉजिटिव ब्लड की आवश्यकता बताई थी।
परिवार की आँखों में चिन्ता, चेहरे पर बेबसी और दिल में बस एक ही उम्मीद थी कि कहीं से जीवन बचाने वाला रक्त मिल जाए।
जरूरतमन्द लोगों ने बलखण्डी नाका निवासी समाजसेवी रत्नेश गुप्ता से फोन में मदद मांगी तो वे भी गर्भवती महिला एवं पेट में पल रहे जुड़वा बच्चों की जान बचाने के लिए जुट गये। समाजसेवी रत्नेश ने शुभम धुरिया से फोन में बात की तो वे सहर्ष रक्तदान करने के लिए तैयार हो गए। ऐसे कठिन समय में शुभम धुरिया ने सिर्फ खून नहीं दिया बल्कि एक माँ की सांसों को सहारा और आने वाले जुड़वा बच्चों को सुरक्षा व पूरे परिवार को नई उम्मीद दी।
समाजसेवी रत्नेश गुप्ता ने बताया कि रक्तदान केवल दान नहीं किसी की धड़कनों को बचाने का सबसे बड़ा मानव धर्म है। सभी के प्रयासों से किसी के घर की खुशियां टूटने से बचाई जा सकती हैं।
रत्नेश गुप्ता ने सभी से आग्रह किया कि सभी को इस पुण्य कार्य में आगे आना चाहिए क्योंकि किसी रक्तदाता का एक प्रयास किसी जरूरतमन्द की पूरी दुनिया बचा सकता है।
इस रक्तदान के नेक कार्य में गीता गुप्ता, नेतराम वर्मा, ब्लड बैंक की डॉक्टर अर्चना यादव, हरदेव, आशीष कुमार, पंकज जायसवाल, प्रमोद द्विवेदी ने सहयोग प्रदान किया।

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