वृंदावन में पकड़ा गया “फर्जी दरोगा”, रथ मेले में झाड़ रहा था रौब — बढ़ी दाढ़ी ने खोल दी पोल
1 min readफिल्मी दारोगा राष्ट्रपति के आगमन से पहले वृंदावन में पकड़ा गया “फर्जी दरोगा”, रथ मेले में झाड़ रहा था रौब — बढ़ी दाढ़ी ने खोल दी पोल
वृंदावन। भक्तों की भीड़, रंगजी मंदिर का भव्य ब्रह्मोत्सव और रथ मेले की चहल-पहल के बीच अचानक ऐसा किरदार सामने आया जिसने पुलिस की भी भौंहें चढ़ा दीं। वर्दी दारोगा की, चाल-ढाल भी वैसी ही… लेकिन एक छोटी-सी बात ने पूरे “रौबदार नाटक” की पटकथा ही बदल दी।
दरअसल, रंगजी मंदिर के ब्रह्मोत्सव के मुख्य आकर्षण रथ मेले में एक युवक पुलिस की दारोगा वाली वर्दी पहनकर लोगों के बीच धौंस जमाता घूम रहा था। मेले में ड्यूटी दे रहे असली पुलिसकर्मियों की नजर जब उस पर पड़ी तो उन्हें कुछ गड़बड़ लगी।
सबसे बड़ा शक उसकी बढ़ी हुई दाढ़ी ने पैदा किया। पुलिसकर्मियों ने देखा कि वर्दी तो पूरी “इंस्पेक्टर स्टाइल” की है, लेकिन दाढ़ी नियमों के मुताबिक नहीं। बस यहीं से कहानी पलट गई।
जैसे ही पुलिस ने उसे रोका, “दरोगा साहब” का रौब हवा होने लगा। पूछताछ में पता चला कि यह कोई असली अफसर नहीं बल्कि हाथरस जिले के मुरसान थाना क्षेत्र के नगला अमरा गांव का शिवम चौधरी है।
युवक ने पुलिस को बताया कि उसके पिता हरिपाल सिंह बुलंदशहर में एक थाने में तैनात हैं। घर में टंगी पिता की वर्दी देखकर उसके दिमाग में “दारोगा बनने का शॉर्टकट” आ गया। बस वही वर्दी पहनकर वह सीधे वृंदावन के रथ मेले में आ पहुंचा और लोगों पर रौब झाड़ने लगा।
मेले में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच यह “फर्जी दरोगा” ज्यादा देर तक अपनी फिल्मी एंट्री नहीं निभा सका। पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़कर वृंदावन थाने ले जाकर पूछताछ शुरू कर दी।
थाना प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार, युवक से यह पता लगाया जा रहा है कि उसने वर्दी किस उद्देश्य से पहनी और मेले में उसकी क्या मंशा थी। तथ्यों की पुष्टि के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वर्दी का रौब भले ही कुछ देर लोगों को भ्रमित कर दे, लेकिन नियमों की नजर से बचना आसान नहीं होता। इसके घरवालों को भी नहीं पता कि ये पुलिस में दारोगा बन गया है ।

