बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के संबंध में एक दिवसीय सीएमपीओज कार्यशाला का किया आयोजन
1 min readजिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं प्रयत्न संस्था द्वारा संचालित परियोजना कवच के संयुक्त तत्वाधान में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के संबंध में एक दिवसीय सी एम पी ओज कार्यशाला का किया आयोजन
धौलपुर

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संजीव मागो के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं प्रयत्न संस्था द्वारा संचालित परियोजना कवच के संयुक्त तत्वाधान में नालसा आशा जागरुकता समर्थन सहायता और कार्यवाही मानक संचालन प्रक्रिया-बाल विवाह मुक्ति की ओर अग्रसर 2025 के संबंध में एक दिवसीय सीएमपीओज कार्यशाला का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभाकक्ष में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेखा यादव, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति मधु शर्मा एवं सदस्य बाल कल्याण समिति माजिद सरीफी की अध्यक्षता में मां सरस्वति की प्रतिमा पर दीप प्रज्जवलित कर एवं माला अर्पण कर किया गया।
इस अवसर पर सचिव रेखा यादव द्वारा उपस्थित लोगों को बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली द्वारा नालसा आशा जागरुकता समर्थन सहायता और कार्यवाही मानक संचालन प्रक्रिया-बाल विवाह मुक्ति की ओर अग्रसर 2025 लागू की गई है। इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करना, पीड़ित बच्चों को कानूनी संरक्षण एवं सहायता प्रदान करना तथा जन-जागरूकता को सशक्त बनाना है। इस मानक संचालन प्रक्रिया के अंतर्गत बाल विवाह की पूर्व सूचना, रोकथाम, पीड़ितों को तत्काल सहायता, कानूनी कार्यवाही एवं पुनर्वास की स्पष्ट कार्ययोजना निर्धारित की गई है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल संरक्षण इकाइयों, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं पैरा लीगल वॉलंटियर्स के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। साथ ही सचिव ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है। इस स्कीम के माध्यम से आमजन को कानून की जानकारी देकर समाज में कानून के प्रति विश्वास एवं जिम्मेदारी विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39ए यह सुनिश्चित करता है कि सभी को समान न्याय मिले, आर्थिक या सामाजिक कमजोरी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। सभी को निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त हो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य गरीब, असहाय व जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क वकील उपलब्ध कराना है। साथ ही सचिव ने न्याय आपके द्वार अभियान के बारे में बताया कि जनउपयोगिता सेवाओं से संबंधित शिकायतों के निर्धारण हेतु 10 नवम्बर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक स्थायी लोक अदालतों के माध्यम से जनउपयोगी सेवाओं से संबंधित शिकायतों का निस्तारण किया जावेगा। शिकायत भेजने का अधिकृत मोबाइल नम्बर 9119365734 है। साथ ही सचिव ने मीडियेशन फॉर दी नेशन अभियान 2.0, राष्ट्रीय लोक अदालत व नालसा हेल्पलाईन नंबर 15100, पॉश एक्ट, पीड़ित प्रतिकर स्कीम, नई चेतना 4.0 महिलाओं के खिलाफ लिंग आधारित हिंसा के विरुद्ध राष्ट्रीय अभियान एवं प्रोटेक्ट टूडे सिक्योर टूमारो शीर्षक से पैन-इंडिया पर्यावरणीय विधिक साक्षरता एवं सामुदायिक संरक्षण पहल का शुभारंभ किया गया है। पहल का उद्देश्य पर्यावरणीय विधिक जागरूकता को सुदृढ करना, सरल एवं किफायती निवारक उपायों को प्रोत्साहित करना, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय अभियान एवं टेली लॉ सेवाओं, भारतीय न्याय संहिता के संबंध में कानूनी जागरुकता एवं बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में भी से जानकारी दी।
अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक हवा सिंह ने बाल विवाह मुक्त भारत के बारे में बताया कि भारत एक प्राचीन सभ्यता वाला देश है, जहाँ परंपराओं और संस्कारों का विशेष महत्व रहा है। लेकिन कुछ कुप्रथाएँ ऐसी भी रहीं हैं, जिन्होंने समाज की प्रगति में बाधा डाली है। बाल विवाह ऐसी ही एक सामाजिक बुराई है, जो बच्चों के अधिकारों का हनन करती है। बाल विवाह मुक्त भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब समाज, सरकार और प्रत्येक नागरिक मिलकर इसके विरुद्ध ठोस कदम उठाएँ।
अध्यक्ष बाल कल्याण समिति मधु शर्मा ने बाल विवाह मुक्त भारत के बारे में बताया कि बाल विवाह का अर्थ है जब लड़की की आयु 18 वर्ष से कम तथा लड़के की आयु 21 वर्ष से कम होने पर उनका विवाह कर दिया जाए। यह न केवल कानून के विरुद्ध है, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए भी अत्यंत हानिकारक है। कम उम्र में विवाह के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और उन पर जिम्मेदारियों का बोझ आ जाता है, जिसे वे संभालने में सक्षम नहीं होते।
सदस्य बाल कल्याण समिति माजिद सरिफी ने बाल विवाह मुक्त भारत के बारे में बताया कि बाल विवाह विशेष रूप से बालिकाओं के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। कम उम्र में गर्भधारण से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे माँ और शिशु दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है। इसके अतिरिक्त, घरेलू हिंसा, कुपोषण और मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं। इस प्रकार बाल विवाह गरीबी और अशिक्षा के दुष्चक्र को और मजबूत करता है।
असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल मीता अग्रवाल ने बाल विवाह मुक्त भारत के बारे में बताया कि बाल विवाह को रोकने के लिए भारत सरकार ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू किया है। इस कानून के अनुसार बाल विवाह कराना दंडनीय अपराध है और दोषियों को कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, समग्र शिक्षा अभियान और किशोरी सशक्तिकरण जैसी अनेक योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा और सुरक्षा प्रदान करना है।
परियोजना अधिकारी रजनी जैन ने संस्था द्वारा संचालित परियोजना कवच के उद्देश्य एवं संस्था की कार्यनीति एवं परियोजना का विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के अंत में जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक वीरेंद्र सिंह जांगल ने जिले में बाल विवाह मुक्त भारत कार्यक्रम से अवगत करवाया एवं जिला स्तर पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला बाल संरक्षण इकाई एवं संबंधित विभागों के साथ मिलकर आयोजना कर कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जाएगा।
इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारी एवं प्रयत्न संस्था के परियोजना अधिकारी रजनी जैन, बाल संरक्षण अधिकारी विजेंद्र कटारिया, पंचायत सहजकर्ता सरनाम सिंह एवं आर्यन आदि उपस्थित रहें।
ब्यूरो विजय शर्मा
