ग्राम पंचायत गरौली में अनियमितताओं की पुष्टि, प्रधान समेत तीन पंचायत सचिव दोषी
1 min readतारुन ब्लॉक की ग्राम पंचायत गरौली में अनियमितताओं की पुष्टि, प्रधान समेत तीन पंचायत सचिव दोषी
अयोध्या।
जनपद के ब्लाक तारुन की ग्राम पंचायत गरौली में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई की जमीन तैयार हो गई है। जांच में ग्राम प्रधान राजनारायण जायसवाल समेत तीन पंचायत सचिव दोषी पाए गए हैं। दोषी पाए गए पंचायत सचिवों में राजकुमार यादव, जय सिंह यादव और मथुरा प्रसाद शामिल हैं। इनमें से मथुरा प्रसाद प्रोन्नति पाकर सहायक विकास अधिकारी बन चुके हैं और वर्तमान में गोंडा जिले में तैनात बताए जा रहे हैं, जबकि जय सिंह यादव और राजकुमार यादव अन्य ब्लॉकों में पंचायत सचिव के पद पर तैनात हैं।
मामले की जांच तीन सदस्यीय समिति ने की, जिसमें जिला विकास अधिकारी महेंद्र देव, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक गिरीश कुमार पाठक तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता शामिल थे। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित विभाग को सौंप दी है।शिकायतकर्ता सुधीर तिवारी ने बताया कि कई वर्षों के संघर्ष के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश श्रीवास्तव द्वारा आइजीआरएस शिकायत के निस्तारण के तहत जांच रिपोर्ट उन्हें भेजी गई। तिवारी का आरोप है कि उन्होंने जिलाधिकारी को शपथपत्र के साथ आठ बिंदुओं पर शिकायत दी थी, लेकिन जांच रिपोर्ट में केवल पांच बिंदुओं को ही शामिल किया गया, जिसमें एक ऐसा बिंदु भी जोड़ दिया गया जो उनकी मूल शिकायत का हिस्सा नहीं था। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि जांच प्रक्रिया में हीलाहवाली किए जाने के कारण उन्हें उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। इसके बाद पंचायती राज विभाग हरकत में आया और शिकायतों की गंभीरता से जांच कराई गई। जांच में दोषी ठहराए जाने के बावजूद अब तक संबंधित तीनों पंचायत सचिवों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की कार्रवाई की संस्तुति नहीं की गई है। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत गरौली की वर्ष 2022-23 और 2023-24 की ऑडिट भी अब तक नहीं कराई गई है। आरोप है कि जानबूझकर पत्रावलियां संपरीक्षा के लिए उपलब्ध नहीं कराई गईं, जबकि इसकी जानकारी पंचायती राज विभाग को पहले से थी। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन संयुक्त विकास आयुक्त अरविंद कुमार जैन द्वारा विद्यालय की बाउंड्रीवाल निर्माण को लेकर की गई स्थलीय जांच रिपोर्ट को पंचायती राज विभाग ने नजरअंदाज कर दिया और तत्कालीन पंचायत सचिव को बचा लिया गया। उल्लेखनीय है कि संयुक्त विकास आयुक्त अरविंद कुमार जैन लगभग एक वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
सुरेश कुमार मिश्र मंडल ब्यूरो

