जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरुण कुमार अग्रवाल ने किया जिला कारागृह का औचक निरीक्षण
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धौलपुर,
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुपालना में अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जिला एवं सेशन न्यायाधीश अरुण कुमार अग्रवाल एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेखा यादव के संयुक्त तत्वावधान में जिला कारागृह का औचक निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने नालसा द्वारा जारी एसओपी में वर्णित दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित किये जाने के एवं आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
निरीक्षण के दौरान जेल में जाकर अलग-अलग बैंरकों का बारीकी से निरीक्षण किया एवं सभी बंदियों से अलग-अलग उनके प्रकरणों की जानकारी प्राप्त की सभी बंदियों से उनकी अपील के संबंध में जानकारी ली उनसे उनके केस, तारीख पेशी, विधिक सहायता, इत्यादि के बारे में पूछा तथा उनके बाद बंदियों से नाश्ता, भोजन, मेडिकल सुविधा, कैंटीन सुविधा, कूलर पंखे लाइट इत्यादि की समस्याओं के बारे में पूछा। निरीक्षण दौरान बैरकों के अंदर पानी जमा हुआ था जिला न्यायाधीश ने जेल अधीक्षक को निर्देशित किया कि तुरंत प्रभाव से पानी का निकास किया जाए जिला न्यायाधीश ने बताया कि पानी जमा होने से काफी बीमारियां पैदा होती है जिससे बंदी बीमार पड़ सकते हैं उसके बाद जिला न्यायाधीश ने बंदियों की जमानत के बारे में सभी बंदियों से पूछा जिसकी भी जमानत हो चुकी है वह तुरंत प्रभाव से जमानत करवाएं एवं एलएडीसीज अधिवक्ताओं को भी निर्देशित किया कि सभी बंदियों को फॉर्मेट उपलब्ध करवाएं, जिसमें उनके नाम, प्रकरण संख्या, अधिवक्ता इंद्राज हों एवं एलएडीसीज अधिवक्ताओं को निर्देशित किया कि जेलों के निरीक्षण के दौरान बंदियों की होने वाली परेशानियों एवं बैंरकों के अंदर जमा पानी इत्यादि समस्याओं को हल करें ताकि बंदियों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो। निरीक्षण दौरान कुछ बंदियों ने अपनी अपीलों के बारे में बताया कुछ बंदियों ने बताया कि हमारी जमानत हो चुकी है कुछ कैदियों ने अपनी सजा के बारे में बताया कुछ बंदियों ने कोई भी समस्या नहीं होना बताया उन्होंने सभी बंदियों से उनके वकीलों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की उन्होंने बताया कि अगर किसी बंदी का वकील नहीं है तो वह लीगल एड क्लीनिक द्वारा अपना वकील निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। महिला बैंरकों का निरीक्षण के दौरान महिलाओं से उनके प्रकरण, वकीलों के नाम इत्यादि की जानकारी ली साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के उपकरणों जैसे डीएमएमडी, बैगेज स्कैनर, एचएचएमडी इत्यादि मशीनों की भी जांच की।
उन्होंने बंदियों को बताया कि यदि किसी विचाराधीन बंदी का उसके प्रकरण में पैरवी हेतु कोई अधिवक्ता नहीं है तो ऐसे बंदी जेल अधीक्षक के माध्यम से अथवा संबंधित न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने पर न्यायालय के माध्यम से नियमानुसार अधिवक्ता नियुक्ति हेतु विधिक सहायता का प्रार्थना पत्र जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भिजवा सकते हैं। जिससे ऐसे बंदीगण की ओर से पैरवी हेतु प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करवाया जा सके।
इसी प्रकार ऐसे सजायाफ्ता बंदी जिन्होंने सजा के खिलाफ अपील नहीं की है और वह अपील करना चाहता है तो ऐसे बंदी को विधि अनुसार अपील करने का पूर्ण अधिकार है और ऐसे बंदी को भी अपील हेतु विधिक सहायता के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध करवाया जावेगा।
इस मौके पर जिला चीफ एलएडीसी अमित कमठान, डिप्टी चीफ एलएडीसी पप्पू सिंह गुर्जर, असिस्टेंट एलएडीसी दीपक सिकरवार, मीता अग्रवाल, आराधना शर्मा, जेल अधीक्षक सुमन मीणा सहित कारागृह का स्टाफ एवं बंदीजन मौजूद रहे।
ब्यूरो विजय शर्मा

