February 11, 2026

Awadh Speed News

Just another wordpress site

पूज्य श्री मुरलीधर जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा में श्रीराम विवाह वर्णन

1 min read
Spread the love

धौलपुर राजस्थान।


पूज्य श्री मुरलीधर जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा में श्रीराम विवाह वर्णन

“सिया-राम विवाह: आदर्श और मर्यादा का दिव्य संगम” – पूज्य मुरलीधर जी महाराज

धौलपुर मचकुंड रोड भगवान परशुराम सदन में सत्संग की अमृत वर्षा करते हुए कथा के पांचवे दिन पूज्य संत मुरलीधर महाराज ने रामचरितमानस में वर्णित भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने इस विवाह को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदर्श, मर्यादा और त्याग का संगम बताया। महाराजश्री ने कहा कि यह विवाह आज के समाज को एक सुसंस्कृत और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
धनुष यज्ञ की दिव्य गाथा
महाराजश्री ने बताया कि किस प्रकार जनकपुरी में राजा जनक ने यह प्रतिज्ञा की थी कि जो भी भगवान शिव के पिनाक धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी के साथ उनकी पुत्री सीता का विवाह होगा। इस स्वयंवर में देश-विदेश के बड़े-बड़े पराक्रमी राजा और राजकुमार आए, लेकिन कोई भी उस विशाल धनुष को हिला भी न सका। सभी राजाओं के निराश होने पर महाराज जनक अत्यंत चिंतित हो उठे।
गुरु की आज्ञा और श्रीराम का पराक्रम।
महाराजश्री ने कहा कि जब सभा में चारों ओर निराशा छा गई, तब महर्षि विश्वामित्र ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को धनुष उठाने की आज्ञा दी। गुरु की आज्ञा पाते ही श्रीराम सहजता से धनुष के पास गए और उसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह धनुष टूट गया। इस अद्भुत दृश्य को देखकर पूरी सभा आश्चर्यचकित रह गई।

महाराज ने कहा कि श्रीराम का यह कार्य न केवल उनकी शक्ति को दर्शाता है, बल्कि गुरु की आज्ञा का पालन करने के उनके आदर्श को भी उजागर करता है।
विवाह की आदर्श परंपरा।
महाराजश्री ने बताया कि धनुष टूटने की सूचना पाकर राजा दशरथ अपनी बारात लेकर जनकपुरी पहुंचे। बारात का भव्य स्वागत किया गया और विवाह की रस्में पूर्ण विधि-विधान से संपन्न हुईं। उन्होंने विवाह के दौरान की गई मंगलमय रीतियों और परंपरओं का वर्णन किया। महाराजश्री ने विशेष रूप से भरत का विवाह मांडवी से, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतिकीर्ति से होने के प्रसंग पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह विवाह केवल एक जोड़ा नहीं, बल्कि चार भाइयों और चार बहनों के बीच संबंधों का एक अटूट बंधन था।

अपने प्रवचन के अंत में, महाराजश्री ने कहा कि श्रीराम और सीता का विवाह हमें कई महत्वपूर्ण सीख देता है। यह सिखाता है कि जीवन में धैर्य और मर्यादा कितनी महत्वपूर्ण है। यह हमें गुरुजनों के प्रति सम्मान और उनकी आज्ञा का पालन करने की प्रेरणा देता है। साथ ही, यह विवाह हमें परिवार के भीतर आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना को बनाए रखने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के समाज में इन आदर्शों को अपनाकर ही हम एक सुखद और सफल जीवन जी सकते हैं।

विवाह की शुभ तिथि:
संत मुरलीधर महाराज ने बताया कि जिस शुभ क्षण में भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता हैं।
पूज्य मुरलीधर महाराज का श्रीराम विवाह वर्णन श्रोताओं के मन में आदर्श और मर्यादा के प्रति गहरी आस्था जगाता है। उनके शब्दों ने श्रोताओं को भगवान राम और माता सीता के पवित्र प्रेम और त्याग का अनुभव कराया। यह प्रसंग हमें यह याद दिलाता है कि धर्म, संस्कृति और आदर्शों का पालन ही हमारे जीवन का सच्चा सार है।
इस अवसर पर श्री राम कथा के मुख्य यजमान राकेश कांटे बेबी, श्री राम कथा के संयोजक श्री भगवान मित्तल सराफ एवं उनके सहयोगी अरविंद शुक्ला, ऋषि मित्तल एवं अन्य लोगों ने व्यास पीठ की आरती की ।

ब्यूरो विजय शर्मा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *