February 12, 2026

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मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है रामकथा :- संत मुरलीधर महाराज

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धौलपुर राजस्थान।
मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराती है रामकथा संत मुरलीधर महाराज

श्री राम भक्त सेवा समिति की ओर से आयोजित 9 दिवसीय राम कथा महोत्सव के दूसरे दिन जोधपुर से पधारे संत मुरलीधर महाराज ने
संगीतमय राम कथा का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। संत मुरलीधर महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा विश्व कल्याणदायनी है, लोक मंगलकारी है। प्रभु श्रीराम का आचरण एवं व्यवहार अपनाने से जीवन आनंदमय हो जाता है। गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज ने श्रीराम कथा के माध्यम से मानव जीवन संबंधों की महत्ता स्थापित की है।

यही वजह है कि श्रीरामचरित मानस में गुरु, माता-पिता, पुत्र-पुत्री, भाई, मित्र, पति-पत्नी आदि का कर्तव्य बोध एवं सदाचरण की सीख हमें सर्वत्र मिलती है। कथा में उन्होंने बताया कि भक्ति मार्ग में सुख शांति का प्रभा है, जहां आनंद की शीतल छाया मिलती है। तुलसीदास ने रामचरितमानस में श्रद्धा को भवानी और विश्वास को शंकर का प्रतिरूप मानते हुए दोनों की समवेत वंदना की है। कहा कि परमात्मा से जुड़ने के लिए श्रद्धा और विश्वास ही तो साधन बनता है। कथा की सार्थकता तब सिद्ध होती है, जब इसे हम दैनिक जीवन के व्यवहार में शामिल करते हैं। राम कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और मन में शांति व मुक्ति मिलती है। भगवान राम का प्रिय भक्त बनना है तो भरत जी और हनुमान जी के चरित्र से सीख लेनी होगी।
संत मुरलीधर महाराज ने बताया कि हम सभी को भगवान शिव जी की शिक्षा लेनी चाहिए
बिना आमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए चाहे वह पिता का घर ही क्यों ना हो
निमंत्रण से जाओगे तो सम्मान होगा वरना तिरस्कार सहना पड़ेगा जैसे सती को सहना पड़ा
महाराज जी ने राम कथा के माध्यम से बताया कि
भक्ति का आदर्श:
भरत जी ने राम की अनुपस्थिति में भी राम राज्य को बनाए रखा। उन्होंने राम को राजा मानकर और स्वयं को उनका सेवक बनकर भक्ति का एक ऐसा आदर्श स्थापित किया, जो पूजनीय है।
रामकथा में भरत का स्थान
रामकथा में भरत के चरित्र को एक महान भक्त और आदर्श राजा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिन्होंने अपने भाई के प्रति असीम भक्ति और निष्ठा दिखाई। भरत की भक्ति राम के प्रति सम्मान का पर्याय है और उन्हें भी उसी पूजनीय स्थान पर स्थापित करती है।

राम कथा में भरत जी को ईश्वर तुल्य तो नहीं, पर ईश्वर के अत्यंत समीप एक ऐसे भक्त के रूप में दर्शाया गया है, जिनकी क्रियाएँ और विचार ईश्वर के समान ही पूजनीय हैं। उन्होंने स्वयं को राम से कम नहीं माना और उनकी पादुकाओं को ही सर्वोपरि रखा, जो उनकी महान भक्ति का प्रमाण है
श्री राम कथा के मुख्य यजमान
रमेश चंद राकेश कांटे श्रीमती बेबी , दैनिक यजमान डॉक्टर केके अग्रवाल डॉक्टर बी डी जिंदल, डॉ बी एम मंगल, हरिओम रस्तोगी , विनोद कुमार गोयल, दाऊ दयाल सिंघल, राकेश मित्तल, डॉ रामावतार अग्रवाल, रामदास अग्रवाल, रामकुमार गर्ग, शिव प्रकाश बिंदल, श्री राम कथा के संयोजक श्री भगवान मित्तल एवम उनके सहयोगी राजकुमार सिंघल गोवर्धन दास पीसी मंगल ,अरविंद शुक्ला, शिव प्रकाश शर्मा, बृजमोहन गोयल, राशि अग्रवाल, शिवा प्रवीण गुप्ता ,अतुल अग्रवाल, राहुल मित्तल रहे।

ब्यूरो विजय शर्मा

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