February 11, 2026

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पिता की संपत्ति में अधिकार को तरस रही हैं दो युवतियां, लेखपाल बताते हैं नियमानुसार सौतेले चाचाओं के नाम हुई वरासत

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पिता की संपत्ति में अधिकार को तरस रही हैं दो युवतियां, लेखपाल बताते हैं नियमानुसार सौतेले चाचाओं के नाम हुई वरासत

ये है हमारे महान भारत देश का संविधान, अपनों की संपत्ति में नहीं है अपनों का अधिकार

मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की महराजगंज तहसील का

रायबरेली।

जनपदद की महराजगंज तहसील बछरावां विकास खंड से एक मामला प्रकाश में आया है । बछरावां विकास खंड के पहनासा गांव में एक रज्जन लाल मिश्रा थे जिनकी मृत्यु जानकारों के अनुसार 1992 में हो गई थी उनकी दो बेटियां उस समय छोटी-छोटी थीं।2015-16 में रज्जन लाल के पिता बाबादीन की भी मृत्यु हो गई। रज्जन लाल बाबादीन की पहली पत्नी सुशीला के इकलौते पुत्र थे और सुशीला की मृत्यु के बाद बाबादीन ने राजरानी के साथ दूसरा विवाह कर लिया था।अब राजरानी से बाबादीन के तीन पुत्र शशींद्र, बृजेश और राघवेन्द्र हुए। नियमानुसार बाबादीन की संपत्ति में रज्जन लाल का अधिकार है और रज्जन लाल की मृत्यु के बाद उनकी संतानों का अधिकार रज्जन लाल की संपत्ति में है। लेकिन रज्जन लाल की बेटियों की शादी किसी ने अपनी स्थिति के अनुसार कर दिया बेचारी अपने अधिकार के लिए भटक रही हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। लेखपाल का कहना है कि रज्जन लाल की बेटियों की शादी हो चुकी है इसलिए उनका कोई अधिकार ही नहीं बनता है नियमानुसार रज्जन लाल के भाइयों शशीन्द्र, बृजेश और राघवेन्द्र के वरासत कर दिया गया है मतलब दो-दो संतानें मौजूद हैं और नियम कानून को ताक पर रखकर दोनों बच्चियों के सौतेले चाचाओं के नाम वरासत करके लेखपाल नियमानुसार वरासत बता रहे हैं। और इस प्रकरण में जब गहराई से तहकीकात इस पत्रकार ने किया तो पता चला कि आज अगर यदि नियमानुसार लेखपाल ने कार्य को अंजाम दिया है तो रज्जन लाल की दोनों पुत्रियों को किस नियम के अनुसार ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने परिवार रजिस्टर से वंचित किया तथा अलग परिवार दर्शा दिया जब सबकुछ नियम कानून के अनुसार हुआ तो परिवार रजिस्टर में अलग परिवार दर्ज की जरूरत शशींद्र बृजेश और राघवेन्द्र को क्यों पड़ी । जबकि इसी परिवार में एक अन्य पुत्री को उसके पिता की संपत्ति का अधिकार दिया गया है और वह भी शादी शुदा थी उसके बाद उसके पिता की मृत्यु हुई थी। वर्तमान समय में वर्तमान लेखपाल द्वारा आख्या में नियमानुसार वरासत बताया है तो उसी परिवार की दूसरी लड़की के मामले में नियम कहा चला गया था।इस प्रकरण में तत्कालीन लेखपाल, तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी,व रज्जन लाल की दोनों पुत्रियों के सौतेले चाचाओं शशीन्द्र, बृजेश और राघवेन्द्र व आख्या प्रेषित करने वाले वर्तमान लेखपाल पर कार्यवाही होना चाहिए वहीं इस संबंध में एक विद्वान अधिवक्ता से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा राजस्व संहिता 2006 के अनुसार मृतक का पुत्र/पुत्री,नाती, आदि अधिकारी हैं तो ये क्या लेखपाल आदि बिना प्रशिक्षण के और नियम कानून ज्ञान दिये ही तैनात कर दिए जाते हैं नहीं ऐसा नहीं है सच तो यह है कि सब भ्रष्टाचार में डूबे हैं किसी हक मारा जाए कोई भी भूखा प्यासा मरे, कोई भीख मांगे इससे इन लोगों को मतलब नहीं है मतलब है तो केवल और केवल भ्रष्टाचार से। सोचनीय विषय है कि सरकार इतना वेतन देती है अन्य भत्ते देती है फिर भी इन भ्रष्टाचारियों का पेट नहीं भरता। लोगों की मानें तो रायबरेली जिले की महराजगंज तहसील इस मामले में बेहद बदनाम है यहां नियम विरुद्ध कार्य बहुत से पाएं जा सकते हैं यदि गहराई से किसी ईमानदार अधिकारी जो गैर विभाग से संबंधित हो से जांच कराई जाए तो और यही हाल रायबरेली के पड़ोसी जिले अमेठी की तिलोई तहसील का है यहां भी अंश निर्धारण में लेखपालों द्वारा तमाम गलतियां की गई हैं बेचारे किसान अंश निर्धारण में सुधार के लिए दर दर भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।आज कल सच्चे का मुंह काला झूठों का बोलबाला वाली कहावत चरितार्थ है।

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