February 11, 2026

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चारों धाम एवं सप्तपूरियों के दर्शन एवं ज्योतिर्लिंग पर अभिषेक ही मोक्ष का मुख्य साधन :- डॉ. मुरलीधर सिंह (अधिवक्ता)

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चारों धाम एवं सप्तपूरियों एवं 12 ज्योतिर्लिंगों पर ज्योतिर्लिंगों पर
चारों धाम एवं सप्तपूरियों के दर्शन ही दर्शन तथा ज्योतिर्लिंग के पर अभिषेक ही मोक्ष का मुख्य साधन है

डॉक्टर मुरलीधर सिंह शास्त्री अधिवक्ता/ विधि अधिकारी माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं लखनऊ

हमारे चारों धाम एवं सप्तपूरियों की पवित्र यात्रा अयोध्या के प्रबोधिनी एकादशी से 12 नवंबर२९२४ से प्रारंभ हुई थी तथा द्वारिका पुरी में सुफला एकादशी के दिन २६)१२/२०२४ संपन्न हुई हमारे देश को एकता में बांधने के लिए चारों धाम की यात्रा महत्वपूर्ण है

भारत के दृष्टिकोण से चारों धाम में बद्री बद्रीनाथ धाम रामेश्वरम द्वारिका पुरी एवं जगन्नाथ पुरी आते हैं

तथा पवित्र भूमि उत्तराखंड के क्षेत्र के केदारनाथ धाम बद्रीनाथ धाम यमुनोत्री एवं गंगोत्री आती आते हैं

इसके अलावा सप्तपुरियों में अयोध्या मथुरा काशी कांची अवंतिका( उज्जैन) द्वारकापुरी जगन्नाथ पुरी आते हैं

इसके अलावे हमारे भगवान शंकर के ज्योतिर्लिंग में प्रमुख१२ सोमनाथ मलिकार्जुन महाकाल ओंकारेश्वर बैद्यनाथ भीम शंकर रामेश्वरम नागेश्वरम काशी विश्वनाथ त्रयंबकेश्वर केदारनाथ घृष्णेश्वर महादेव के मंदिर आते हैं
विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग में रामेश्वर यह भगवान राम से संबंधित एवं नागेश्वर नाथ जी का भगवान श्री कृष्ण के राजधानी द्वारिका से संबंधित में स्थित है
यह दोनों वैष्णव संप्रदाय एवं शिव संप्रदाय के एकता के सूत्रधार हैं
भगवान श्री कृष्ण ने अपनी राजधानी द्वारिका के पास नागेश्वर जी की हमेशा अभिषेक करते थे तथा अपना शरीर त्याग उन्होंने सोमनाथ जी के गोद में किया था
भगवान श्री कृष्णा सबसे बड़े शिव के ऊपर उपासक एवं प्रवर्तक थे
भगवान विष्णु के एवं भगवान शंकर के उपासकों को राष्ट्र को बचाने के लिए एक होने की आवश्यकता आवश्यकता है

द्वारकाधीश मंदिर के पास ही उसकी एक दूसरे की दीवाल से सटा हुआ शंकराचार्य का शारदा पीठ है दोनों एकता के सूत्रधार हैं

हमारे जैसे भक्तों द्वारा आदरणीय गुरुओं की संतों की मा देवताओं की पितृ देवों की देवियों की आशीर्वाद तथा आपके शुभ वचनों के कारण चारों धाम की यात्रा एवं सप्तपूरियों की यात्रा तथा ज्योतिर्लिंगों की यात्रा प्रबोधिनी एकादशी 12 नवंबर 2024 से शुरू की गई तथा

सफला एकादशी एकादशी 26 दिसंबर 2024 को पुरी की गई

यात्रा हमारी धर्मपत्नी के साथ राज की सेवा से निवृत्ति/अलग होने के कारण से शुरू की गई इस यात्रा में लगभग 4.80 हजार लाख खर्च आया तथा 1 .25 लाख दान पूर्ण भंडारे में खर्च किया गया
ज्यादातर यात्राएं हवाई मार्ग से की गई जिसमें लखनऊ चेन्नई पुणे मुंबई अहमदाबाद राजकोट कोलकाता रांची पटना त्रिवेंद्रम आदि एयरपोर्ट थे जिसमें सबसे खराब एयरपोर्ट लखनऊ का है यह चिंतन का विषय है

तथा भारत के समझाने के लिए स्थानीय लोगों से एवं संस्थाओं के पुस्तकों का अध्ययन किया गया

जिसमें पाया गया यह यात्रा वास्तव में हमारे मनुष्यों द्वारा जगतगुरु विद्वानों द्वारा भारत को एकता में बांधने के लिए और एक दूसरे को समझने के लिए शुरू की गई थी

यह यात्रा उत्तर से दक्षिण छोड़ एवं पूर्व से पश्चिम छोड़ की है
भारतीय धर्म शास्त्रों में भारत की जाति व्यवस्था को वर्ण व्यवस्था के रूप में निरूपित किया गया है
पर आज के बदलते हुए परिवेश में जहां इस देश में हिंदू मुस्लिम सिख क्क्रिश्चियन बौद्ध जैन रहते हैं
उसे देश में वर्ण व्यवस्था एवं जाति व्यवस्था
एक कर्म क्षेत्र की व्यवस्था बन गई है (जगबल्क संहिता में लिखा है की जन्मते शूद्रपि कार्मिनती ब्राह्मण )हमारे धर्म शास्त्रों में यह बात प्रतिपादित है कि प्रत्येक व्यक्ति जन्म से शुद् (shudra) होता है तथा कर्म से ब्राह्मण की एवं संस्कार की प्राप्ति करता है

हमारे भारतीय संविधान भी इसकी इजाजत देता धार्मिक स्वतंत्रता व्यक्ति क्या निजता का अधिकार है
जिसमें ब्राह्मण या विद्वान वह है जो विद्या अध्ययन करता है उपदेश करता है
क्षत्रिय वह है सेवा के रूप में सेवा के रूप में बड़ी सुरक्षा नायक के रूप में विभिन्न सीमाओं से देश को बचाने के लिए सुरक्षा कर्मी के रूप में गार्ड के रूप में सेवा करता है
वैश्य समाज वह है जो व्यापार करता है राजनीति करता है उद्योग धंधा लगता है
पर वर्तमान समय में भारत में कोई भी शुद् (shudra)नहीं है सभी उच्च वर्ग में आ चुके हैं

क्योंकि उच्च वर्ग का आधार केवल आर्थिक एवं राजनीतिक है
सभी जातियों में या विभिन्न धर्म के लोगों में आपसी शादी विवाह होते हैं तथा हो रहे हैं
ऊंचे पद पर बैठे हुए लोग केवल अर्थ को ही अपना जाति और समाज मानते हैं
या राजनेताओं में व्यापारियों में देखा जा सकता है
अधिकारियों में देखा जा सकता है अलग-अलग संस्कारों का केवल मानक रह गया
यह भारत के विभिन्न कोने में देखने को मिला
जो परिश्रम करता है जो सदाचरण करता है वह सफल होता है
और जो हवा बाजी करता है धोखेबाजी करता है वह कुछ समय के लिए सफल होता है

परंतु पूर्ण रूप से उसका देवी शक्तियों द्वारा नाश किया जाता है पाटन कराया जाता है

भारत में जो पवित्र तीर्थ स्थान का भ्रमण करता है उससे समाज एक प्रेरक के रूप में रूप में देखा है
एवं वह व्यक्ति वास्तव में आंतरिक दृष्टि से एवं एवं बाहर की दृष्टि से बदल जाता है

तथा वह सभी कर्म के पापों से मुक्त हो जाता है तथा निश्चित रूप से स्वर्ग का देवलोक का अधिकारी होता है
ऐसा हमारे प्राचीन काल में राजाओं ने महर्षियों ने विद्वानों ने इस पथ पर चलकर चलकर समाज को दिशा दिया है
इस प्रकार हमारे सिख धर्म में जो गुरु गुरु जी के जन्म स्थान का भ्रमण करता है वह पवित्र माना जाता है

हमारे जैन धर्म में तीर्थंकर महात्माओं के जन्म स्थान एवं परिनिर्वाण स्थान को भ्रमण करता है वह पवित्र माना जाता है

हमारे बौद्ध धर्म में जो भगवान गौतम बुद्ध के जन्म स्थान लुंबिनी बोधगया सारनाथ एवं कुशीनगर परी निर्माण स्थल का भ्रमण करता है वह पवित्र माना जाता है
इस्लाम धर्म में जो हज यात्रा मक्का मदीना का करता है वह हाजी कहलाता है वह भी पवित्र व्यक्ति कहलाता है
सभी से समाज एक अपेक्षित आदर्शात्मक आचरण की अपेक्षा करत की अपेक्षा करता है
एवं उसे पथ पर चलता है अन्यथा धाम यात्रा का किसी भी धर्म में कोई महत्व नहीं जो व्यक्ति धर्म यात्रा के बाद गलत पथ पर चलता है
उसे समाज का और राष्ट्र का पतन निश्चित है
हमारा यह स्पष्ट सुझाव है की केंद्रीय सरकार को राज्य सरकार को धार्मिक संस्थाओं की सभी की सूची बननी चाहिए
तथा उसे सूची को बनाकर उसके लिए नियामक बनाना चाहिए
तथा धार्मिक संस्थाओं को एक विशेष धार्मिक संस्थाओं से एक विशेष वर्ग के कब्जे को हटाकर आम के लिए उपलब्ध कराना चाहिए
उसके लिए सरकार को सुविधा बढ़ाना चाहिए और साथ ही साथ उचित उसे पर सुविधा बढ़ाने के लिए शुल्क भी लेना चाहिए

तथा सभी मंदिरों स्थान के लिए मानक के अनुसार परंपरा के अनुसार ड्रेस कोड निश्चित करना चाहिए
कोई भी अर्धनंग नंगा कपड़ा पहनकर मंदिर में जाता है आराधना करता है
इससे समाज के संस्कारों पर असर पड़ता है
नदियों के पवित्रता के लिए प्रदूषण के नियंत्रण हेतु कार्रवाई करनी चाहिए
तथा समाज को प्रेरित करना चाहिए
भारत सरकार एवं राज्य सरकार के पूर्व अधिकारी हैं ISKCON के PATRONपैटर्न है श्री अयोध्या जी सेवा न्यास के प्रमुख हैं तथा अनेक संस्थाओं के प्रशासनिक एवं विधिक एवं मीडिया सलाहकार भी हैं
माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं लखनऊ पीठ में अधिवक्ता / विधि अधिकारी हैं गरीबों की महात्माओं की माता की एवं एवं देश प्रेमियों की निशुल्क सेवा अपने लखनऊ केंद्र/ अयोध्या केंद्र /वृंदावन केंद्र काशी केंद्र /चित्रकूट केंद्र /से करते हैं।

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