शिक्षा साहित्य की रचना समय की आवश्यकता : डॉ. मुरारी झा—-शैक्षिक संवाद मंच की रचनात्मक लेखन कार्यशाला सम्पन्न—-80 शिक्षक-शिक्षकाओं ने की सहभागिता—#
1 min readशिक्षा साहित्य की रचना समय की आवश्यकता : डॉ. मुरारी झा
- शैक्षिक संवाद मंच की रचनात्मक लेखन कार्यशाला सम्पन्न
- 80 शिक्षक-शिक्षकाओं ने की सहभागिता
बांदा। साहित्य समाज को जोड़ता है और बदलाव में भूमिका भी निभाता है। आज दलित साहित्य, स्त्री साहित्य, राष्ट्रवादी एवं अन्य साहित्य आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और लिखा जा रहा है, किंतु शिक्षा पर केंद्रित साहित्य भरपूर मात्रा में उपलब्ध नहीं है। खासकर ऐसा शिक्षा साहित्य जो शिक्षकों द्वारा स्वयं रचा गया हो, इसकी संख्या नगण्य है। आज समय की आवश्यकता है कि शिक्षकों द्वारा शिक्षा साहित्य लिखा जाए और पाठकों तक पहुंचे। शैक्षिक मुद्दों पर शिक्षक ही अन्य लेखकों से कहीं अधिक वास्तविक, विश्वसनीय और जमीनी लेखन कर सकते हैं।
उक्त विचार शैक्षिक संवाद मंच द्वारा रविवार को आयोजित आनलाइन रचनात्मक लेखन प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम सत्र में बतौर प्रशिक्षक डॉ. मुरारी झा, नई दिल्ली ने उपस्थित रचनाधर्मी शिक्षक शिक्षिकाओं के मध्य व्यक्त किये। इसके पूर्व सत्र के आरंभ में शैक्षिक संवाद मंच के संयोजक शिक्षक एवं साहित्यकार दुर्गेश्वर राय ने उपस्थित प्रतिभागियों एवं अतिथि वक्ता का स्वागत किया। मंच संस्थापक प्रमोद दीक्षित मलय ने प्रशिक्षक डॉ. मुरारी झा का परिचय देते हुए शैक्षिक संवाद मंच द्वारा प्रकाशित शिक्षकों के आत्मकथापरक आलेख संग्रह ‘मेरी शिक्षकीय यात्रा’ के संबंध में जानकारी दी और मंच के ध्येयवाक्य ‘विद्यालय बनें आनंदघर’ पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन में डॉ. मुरारी झा ने आगे कहा कि शिक्षा पर जो साहित्य उपलब्ध है इसका अधिकांश भाग दूसरे लोगों द्वारा लिखा गया है। आज शिक्षकों को सोचना होगा कि अपने कार्य क्षेत्र की समस्याओं, चुनौतियों, बाधाओं एवं संघर्ष के समाधान तथा कक्षागत अनुभवों, नवाचार प्रयोगों एवं नवीन शिक्षण विधाओं को पाठकों तक कैसे पहुंचाएं, यह लेखन से ही सम्भव होगा। शिक्षक प्रत्यक्षतः इन मुद्दों से जुड़ा होने के कारण अपने लेखन में न्याय कर पाएगा। शिक्षकों को वास्तव में रुचिपूर्ण शैक्षिक लेखन का उत्तरदायित्व गंभीरतापूर्वक स्वीकारना होगा। शिक्षकों का यह लेखन शिक्षा नीति निर्धारकों को भी दिशा और संबल देगा। सतत लेखन शिक्षकों का व्यक्तित्व विकास के साथ उनमें समझ और दृष्टि भी विकसित करता है। डॉ. मुरारी झा ने अपने विषय ‘लेखन की बुनियाद : देखना, समझना और व्यक्त करना’ को बखूबी व्यक्त करते हुए उपस्थित सहभागियों को लेखन के महत्वपूर्ण सूत्र भी साझा किये और सवालों के जवाब दिए। इस प्रशिक्षण सत्र में उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कुल 80 शिक्षक रचनाकार उपस्थित रहे। तकनीकी सहयोग विनीत कुमार मिश्रा, प्रीति भारती और दुर्गेश्वर राय ने संभाला। उल्लेखनीय है कि शैक्षिक संवाद मंच द्वारा आयोजित इस रचनात्मक लेखन कार्यशाला में तीन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे और प्रत्येक सत्र के बाद सहभागियों को एक टेस्ट पेपर देना होगा। उपस्थित सहयोगियों ने इस प्रशिक्षण सत्र को अपने लिए बहुत उपयोगी और सहायक मानते हुए सराहना की। अगले प्रशिक्षण सत्र 27 अक्टूबर की शाम को अनिल सिंह (भोपाल) प्रशिक्षक के रूप में रचनात्मक लेखन पर आगे के विषय पर संवाद करेंगे।

प्रमोद दीक्षित. मलय की कलम से
उमंग सिंह ब्यूरो चीफ बाँदा
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