ग्रामीणों ने जाति सूचक शब्द का बोर्ड में प्रयोग होने से व्यक्त की नाराजगी किया प्रदर्शन
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अयोध्या

जनपद में महाराजा सुहेलदेव बैस, जिन्होंने सन 1034 ई० में मुहम्मद गजनवी के भांजे मुस्लिम आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी को युद्ध में मार गिराया था, वह एक सूर्यवंशी बैस क्षत्रिय थे। पिछले कुछ वर्षों में भिन्न भिन्न जातियों के नेताओ द्वारा उन्हें अपनी जाति का बताया जाना शुरू किया गया है जिसका समस्त भारतवर्ष के क्षत्रियों द्वारा समय समय पर विरोध किया जाता रहा है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार ने महाराजा सुहेलदेव के नाम के साथ किसी भी जाति सूचक शब्द का प्रयोग नहीं किया है और इस विषय के संवेदनशील होने की वजह से सरकार भी आधिकारिक रूप से उन्हें किसी जाति विशेष के दायरे में बांधने से बचती रही है। हाल में ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चित्तौरा झील, जनपद बहराइच में बनाए जा रहे उनके स्मारक में भी किसी जातीय शब्द का प्रयोग नहीं है और उक्त स्मारक का नाम’ महाराजा सुहेलदेव स्मारक’ मात्र है। शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उक्त स्मारक के नाम में एक जाति विशेष का नाम जोड़ा गया था किंतु समस्त भारतवर्ष के क्षत्रियों के मुखर विरोध का सम्मान करते हुए उक्त स्मारक का नाम बिना किसी जाति सूचक शब्द के रखा है। महापुरुषों को जातीय सीमा में बांधना उचित भी नही है क्योंकि महापुरुष सबके है जातीय विद्वेष की भावना को यह कम भी करता है। सरकार का यह कदम सराहनीय है। जगदीशपुर विधानसभा से विधायक श्री सुरेश पासी द्वारा ग्रामसभा कन्जास में लखनऊ वाराणसी राजमार्ग के किनारे हाल में ही बनवाए गए एक द्वार का नाम’ महाराज सुहेलदेव पासी स्मृति द्वार’ रखा गया है। महोदय, यह न केवल चिंता का विषय है कि सरकार के ही एक प्रतिनिधि द्वारा सरकार के इस विषयक निर्णय का उल्लंघन किया गया है बल्कि स्थानीय सामाजिक ताने बाने को भी अपूर्णीय क्षति पहुंचाई गई है। ज्ञात रहे है की सुल्तानपुर और अमेठी की सीमा में चौदह कोस के क्षेत्र में लगभग 50,000 भाले सुलतान क्षत्रिय, महाराजा सुहेलदेव के सीधे वंशज हैं और उनमें उनके ही पूर्वज महाराज सुहेलदेव बैस के नाम को किसी और जाति से जोड़े जाने को लेकर भीषण आक्रोश है। भाले सुलतान क्षत्रिय कल्याण समिति उनके ही द्वारा बना गई एक सामाजिक संस्था है जो क्षत्रिय इतिहास के संरक्षण, प्रचार प्रसार और अन्य सामाजिक कार्यों में सहभागिता देती रही है।
ग्राम कंजास स्थित उक्त गेट पर अंकित महाराज सुहुलदेव के नाम से जातिसूचक शब्द (पासी) अविलंब हटवाने का कष्ट करें, उक्त गेट पर सरकार द्वारा यदि अपनी वर्तमान नीति के अनुसार केवल’ महाराज सुहेलदेव द्वार’ भी लिखा जाता है तो हम सब को कोई आपत्ति नही है। यदि सरकार द्वारा उक्त गेट से जातिसूचक शब्द को नहीं हटाया जाता है तो स्थानीय भालेसुलतान क्षत्रिय उक्त गेट के नीच ही लोकतांत्रिक तरीके से धरना/विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। इस अवसर पर भाले सुल्तान कल्याण समिति के अध्यक्ष राय भानु प्रताप सिंह, प्रभात सिंह, कैप्टन देवनाथ सिंह, सत्य शरण सिंह, ओंकार सिंह, पिपरी अमरीश सिंह, मुदित प्रताप सिंह,सहित आदि भारी संख्या में क्षत्रिय मौजूद रहे।
रिपोर्टर – अखिलेश सिंह
