February 12, 2026

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केन और यमुना का पानी गांवों में घुसने लगा दोनों नदियों का पानी, राज्यमंत्री ने लिया बाढ़ का जायजा

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बांदा

जनपद के बरियारपुर बियर की क्रस्टवाल के ऊपर से पानी की मोटी धारा केन नदी में गिर रही है। जिससे केन नदी खतरे का निशान पार कर तबाही मचाने को आतुर हो गई है। मंगलवार को केन नदी खतरे के निशान से करीब ढाई मीटर ऊपर हो गई, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
उधर, चिल्ला में यमुना नदी में जल स्तर भी बढ़ रहा है। केन और यमुना नदियों के किनारे आबाद गांवों के भीतर बाढ़ का पानी घुसने लगा है।

सीमावर्ती मध्य प्रदेश की कैमाहा और मंडला घाटियों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से बांध और नदियां उफनाने लगी हैं। केन नदी खतरे का निशान लगभग तीन मीटर पार कर गई। यहां खतरे का निशान 104 मीटर है। मंगलवार की शाम केन नदी खतरे के निशान को करीब ढाई मीटर पार कर 106.36 मीटर के तक पहुंच गई। केन नदी का अचानक जल स्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों के सड़क मार्ग बाढ़ के पानी की चपेट में आने से मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

केन नदी का जलस्तर बढ़ने से चिल्ला घाट पर यमुना का पानी भी लगातार बढ़ रहा है। हालांकि शाम पांच बजे की रिपोर्ट के अनुसार केन नदी का जलस्तर बीते दो घंटे से स्थिर बताया गया है। लेकिन यमुना नदी का जलस्तर पर 20 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार केन का जलस्तर जहां 107 मीटर तक पहुंच गया है, वहीं चिल्ला घाट में यमुना नदी भी 96.99 मीटर पर पहुंच गई। हालांकि यमुना नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बताई जा रही है।

बताते हैं कि पैलानी तहसील क्षेत्र में कई गांवों में लोगों के घरों में पानी भरने के कारण जलमग्न हो गए हैं। पैलानी तहसील के नरी-पलरा, सिंधनकलां मार्ग पर बने रपटे बाढ़ में डूब गए हैं, ऐसे में दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूट चुका है और सिंधनकलां, अदरी, बसधरी, लसडा आदि में लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।
वहीं तहसील प्रशासन लगातार नाव की व्यवस्था करने के साथ-साथ लाइफ जैकेट व अन्य उपकरणों के साथ लागों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
केंद्रीय जल आयोग अभियंता अभिषेक मधेसिया ने बताया कि बरियारपुर का लेवल 607 फीट है। 622.2 फीट ऊपर पानी पहुंच गया है। लगभग 9,3,887 क्यूसेक पानी केन नदी में डिस्चार्ज हो रहा है। वहीं, गंगऊ बांध से 3,36,546 क्यूसेक पानी केन नदी में आ रहा है।

बाढ़ का पानी गांवों में घुसने से विद्युत विभाग ने सुरक्षा की दृष्टि से कई गांवों की बिजली आपूर्ति ठप कर दी है। बताया गया है कि कहला, गंछा, कनवारा, पेयजल आदि इलाकों की विद्युत आपूर्ति ठप है। गांव के लोगों को बाढ़ के खतरे के बीच अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है।

प्रदेश के जलशक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद ने निचले इलाकों में बसे गांवों का भ्रमण कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया और प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव मदद करने का निर्देश दिया। राज्यमंत्री श्री निषाद ने मंगलवार को चिल्ला, तारा, खजुरी, सिंधनकलां के तुर्री नाला मार्ग, नांदादेव मार्ग का निरीक्षण कर ग्रामीणों से जानकारी ली और अधिकारियों को बाढ़ की व्यवस्था पर अलर्ट मोड पर रहने को लेकर निर्देश दिया।

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