रानी लक्ष्मीबाई सांस्कृतिक क्लब के तत्वावधान में किया गया भव्य दीवारी नृत्य कार्यक्रम का हुआ आयोजन
1 min readबांदा
महाविद्यालय में नवगठित रानी लक्ष्मीबाई सांस्कृतिक क्लब के तत्वावधान में किया गया भव्य दीवारी नृत्य का आयोजन।
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार लोक संस्कृतियों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से अतर्रा पी. जी. कालेज अतर्रा (बांदा) में नवगठित रानी लक्ष्मीबाई सांस्कृतिक क्लब के तत्वावधान में पौराणिक बुन्देली लोकनृत्य दीवारी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अवधेश चन्द्र मिश्रा ने बुन्देली संस्कृतियो के संरक्षण एवं संवर्धन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बुन्देली दीवारी नृत्य का उद्भव भगवान राम के समय लंका विजय के उपरांत अयोध्या पहुंचने पर हुआ। उस समय अयोध्या में हर्षोल्लास का वातावरण था। लाखों की संख्या में दीप प्रज्ज्वलित किये गये। जिसे दीपावली या दीवाली का नाम दिया गया। इस अवसर पर जिस विशेष नृत्य की प्रस्तुति हुई उसे दीवाली नृत्य का नाम दिया गया।आगे चलकर अपभ्रंश होकर इसे दीवारी नृत्य कहा जाने लगा। इसका क्रमिक विकास द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के समय हुआ। कार्यक्रम की अगली कड़ी में पूर्व निर्धारित दीवारी नृत्य का लगभग 02 घंटे तक भव्य आयोजन किया गया जिसमें महाविद्यालय के छात्रों ने दीवारी नृत्य की टीम एवं उसके संयोजक श्री रमेश पाल के साथ दीवारी नृत्य की विभिन्न भाव भंगिमाओं का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सांस्कृतिक क्लब के प्रभारी डॉ. पी. के. विश्वकर्मा, डॉ. पी.पी. पुरवार, डॉ. राजेश श्रीवास्तव, डॉ. राजीव रत्न द्विवेदी, डॉ. मिथलेश पांडे, डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. नमिता अग्रवाल, तथा सांस्कृतिक क्लब के सभी सदस्य डॉ. सतीश कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मैत्री सिंह, डॉ. मोहम्मद हलीम खान, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. तरूण शर्मा, डॉ. अनन्त कुमार त्रिपाठी, कु. पूनम देवी तथा अन्य सभी शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारी व एकं सैकड़ा से अधिक छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे।
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