सकारात्मकता के साथ अभिभावक संपर्क करके विद्यालय मे छात्र उपस्थिति बढाई जा सकती-इसमें कोई दोराय नहीं-अनीता पाल प्रधानाध्यापिका
1 min readअमवामाफी/भदोही-
जब भी कोई अवकाश होता है , उसके पश्चात या कोई काम होता है तो अनावश्यक रुप से अभिभावक बच्चोँ को घर पर रोक लेते हैं, यह उचित नहीं है, शिक्षा का भाव जगाने एवं प्रतिदिन बच्चों को विद्यालय भेजने के उद्देश्य से आज जगन्नाथपुर एवं चंद्र पुरा गांव में बच्चों को बुलाने हेतु गई। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं, इसलिए हमें उन्हें अच्छी नैतिकता और बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कराने पर जोर देना चाहिए, ताकि वे भविष्य में एक जिम्मेदार व्यक्ति बन सकें। शिक्षा से बच्चों में यह भी समझने की क्षमता उजागर होती है, कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है। शिक्षा का पहला अनुभव, बच्चा अपने घर से सीखता है। एक बच्चे के जीवन में उसका पहला विद्यालय (प्रथम पाठशाला) परिवार होता है। माता-पिता बच्चे के भविष्य को एक आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बच्चे अपने घर में अधिक समय बिता रहे हैं, तो उनके माता-पिता को उन्हें एक स्वस्थ वातावरण देना चाहिए। माता पिता को यह भी समझाया गया कि येन केन प्रकारेण बच्चों को विद्यालय अवश्य भेजें।






प्रधानाध्यापिका अनीता पाल मीडिया प्रभारी उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ भदोही
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समस्त भारतवासियों से अनुरोध🙏-वृक्ष नहीं होंगे तो बादलों को कौन आमंत्रित करेगा-वृक्ष है -तो जल है🌧️आक्सीजन बाबा-रामकृष्ण अवस्थी-शिक्षा मित्र 🇮🇳 ( बेटा माँ भारती का)🇮🇳-प्राथमिक विद्यालय खुरहण्ड-क्षेत्र-महुआ जनपद -बाँदा (उत्तर प्रदेश) के स्वतः 🌳वृक्षारोपण अभियान को सभी आगे बढाएं🌳- एक सदस्य 🌳-एक वृक्ष स्वतः लगाएं🌳 ।। स्वतः गुठली बैंक बनाकर पौंध तैयार करें, 🌱एक दूसरे को पौंधा दान देकर 🌱धरा को हराभरा बनाएं🌱।। घर-घर तुलसी 🌿.हर घर तुलसी🌿।।🌽सेहत का राज-मोटा अनाज🌽।।🧘♂️योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं🧘♀️।।☔
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