*राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ एक विशाल वटवृक्ष हैं-हम किसी का विरोध नहीं करते लेकिन परिस्थितियों के अनुसार सवाल पूँछना लाजिमी है आदर्श शिक्षक ऋतुराज खरे ने उठाई कलम देखें-#*
1 min read“सवाल पूछना लाजिमी है”
(ऋतुराज खरे की कलम से)
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बढ़ते हुए कद को देखकर कुछ लोगों के पेट में गुड गुड गुड गुड तेजी से होने लगा है!
वे लोग हमारे नवनिर्वाचित पदाधिकारिओ को डराते हैं ,धमकाते है, यह सोच कतई भी स्वीकारने योग्य नहीं है !
हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, अरे भाई हम भी एक शिक्षक हैं, हमारा भी शैक्षिक संगठन है ,और मान्यता प्राप्त संगठन है, हम शिक्षक हित में ही कार्य करना चाहते हैं- तो आपको बेचैनी क्यों हो रही है ? आप शिक्षकों के रहनुमा है बेशक आप बने रहिए ,और अपना कार्य करते रहिये!! परंतु हम कौन सी गान्जा की फैक्ट्री लगा रहे हैं। हमारा भी तो शिक्षकों का ही संगठन है, हम भी तो शिक्षकों के हित में कार्य करना चाहते हैं, तो आपके पेट में इतना दर्द क्यों उठ रहा है?? बेशक किसी संगठन की स्थिति ज्यादा अच्छी हो सकती है ज्यादा मजबूत हो सकती है और किसी की कम हो सकती है वह अलग बात है, जनपद बांदा में शिक्षकों के कई शैक्षिक संगठन है जो अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार शिक्षकों के हित में कार्य करते हैं, और करना भी चाहिए ! इसी कड़ी में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ भी अपना कार्य करता है हम किसी का विरोध नहीं करते ना तो किसी की निंदा करते हैं परंतु यदि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की बढती लोकप्रियता से किसी को डर लग रहा है तो यह डर हमे अच्छा लगा!

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समस्त भारतवासियों से अनुरोध🙏-वृक्ष नहीं होंगे तो बादलों को कौन आमंत्रित करेगा-वृक्ष है -तो जल है🌧️आक्सीजन बाबा-रामकृष्ण अवस्थी-शिक्षा मित्र 🇮🇳 ( बेटा माँ भारती का)🇮🇳-प्राथमिक विद्यालय खुरहण्ड-क्षेत्र-महुआ जनपद -बाँदा (उत्तर प्रदेश) के स्वतः 🌳वृक्षारोपण अभियान को सभी आगे बढाएं🌳- एक सदस्य 🌳-एक वृक्ष स्वतः लगाएं🌳 ।। स्वतः गुठली बैंक बनाकर पौंध तैयार करें, 🌱एक दूसरे को पौंधा दान देकर 🌱धरा को हराभरा बनाएं🌱।। घर-घर तुलसी 🌿.हर घर तुलसी🌿।।🌽सेहत का राज-मोटा अनाज🌽।।🧘♂️योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं🧘♀️।।☔
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