September 23, 2026

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अगस्त कुंड में खुदाई के दौरान मिलीं 68 साल पुरानी सीढ़ियां, संरक्षण की मांग हुई तेज

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अगस्त कुंड में खुदाई के दौरान मिलीं 68 साल पुरानी सीढ़ियां, संरक्षण की मांग हुई तेज

ग्रामीण बोले- वैज्ञानिक सर्वे कराकर धरोहर के रूप में विकसित किया जाए

गोण्डा। जिले के कर्नलगंज तहसील क्षेत्र के सकरौरा ग्रामीण ग्राम पंचायत के सुदिया गांव स्थित भगोले पुरवा के पौराणिक अगस्त कुंड की आखिरकार सुधि ली गई। प्रशासन के निर्देश पर कुंड की खुदाई और साफ-सफाई का कार्य शुरू कराया गया है। खुदाई के दौरान पत्थरों से निर्मित करीब 68 वर्ष पुरानी सीढ़ियां मिलने से स्थानीय लोगों में उत्साह है। सीढ़ियों पर अंकित शिलालेख से इनके निर्माण का समय और निर्माण कराने वालों की जानकारी भी सामने आई है। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने स्थल के संरक्षण और वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग तेज कर दी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अगस्त कुंड और आश्रम लंबे समय से श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। इसे महर्षि अगस्त्य मुनि की तपोस्थली के रूप में मान्यता प्राप्त है। आश्रम परिसर में महंत स्वर्गीय बाबा राम स्वरूप दास और उनके शिष्य स्वर्गीय बाबा जय श्री दास जी महाराज की समाधियां भी मौजूद हैं। वर्ष 2020 में ग्राम लालेमऊ निवासी पूर्व अध्यापक राम नेवाज सिंह ने अपने पूर्वजों की स्मृति में बाबा जय श्री दास जी महाराज की समाधि समेत आश्रम परिसर के कई हिस्सों की मरम्मत और जीर्णोद्धार कराया था।

खुदाई में सामने आया पुराना इतिहास

अगस्त कुंड की खुदाई के दौरान पत्थर की प्राचीन सीढ़ियां मिलने से लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। सीढ़ियों पर अंकित शिलालेख के अनुसार इनका निर्माण संवत 2015 में स्वर्गीय श्रीमती यशोदा देवी की पुण्य स्मृति में उनके पुत्र भगोले, बद्री प्रसाद मुनीम और रामशरण रावी निवासी सकरौरा, कर्नलगंज ने कराया था। संवत 2015 को वर्तमान ईस्वी कैलेंडर के अनुसार करीब 1958-59 माना जाता है। इस लिहाज से सीढ़ियां करीब 68 वर्ष पुरानी हैं।

कब्जे की आशंका से ग्रामीण चिंतित, कुछ लोगों की लंबे समय से खड़ी है नजर

ग्रामीणों का आरोप है कि अगस्त कुंड और आश्रम की भूमि पर कुछ लोगों की लंबे समय से नजर है। जमीन पर कब्जे और उसे बेचने के प्रयास की आशंका भी ग्रामीणों ने जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विरोध के चलते पूर्व में ऐसे प्रयास सफल नहीं हो सके, लेकिन अब भी भूमि को लेकर खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से राजस्व अभिलेखों में भूमि की स्थिति स्पष्ट कराकर उसे सुरक्षित कराने और किसी भी तरह के अवैध कब्जे पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की है।

किसान यूनियन की पहल के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान

अगस्त कुंड के संरक्षण का मुद्दा भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रतापबली सिंह ने प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को ज्ञापन भेजकर कुंड की खुदाई, सफाई और संरक्षण की मांग की थी। इसके बाद सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी आवाज उठाई। मामले को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद 15 जुलाई को अगस्त कुंड की खुदाई और सफाई का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। इसके बाद कार्य शुरू कराया गया।

रामायण काल से जुड़ी हैं धार्मिक मान्यताएं

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सुदिया-सकरौरा क्षेत्र में प्राचीन काल में महर्षि अगस्त्य मुनि ने आश्रम स्थापित कर तपस्या की थी। श्रद्धालु इस क्षेत्र को रामायण काल से भी जोड़कर देखते हैं। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम महर्षि अगस्त्य के आश्रम पहुंचे थे। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं का स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
क्षेत्र के लोग यह भी बताते हैं कि कर्नलगंज का प्राचीन नाम सकरौरा माना जाता है। इसी क्षेत्र में गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास से जुड़ा आश्रम और त्रिमुहानी संगम जैसे धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। ऐसे में अगस्त कुंड को क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

वैज्ञानिक सर्वेक्षण और संरक्षण की मांग

अगस्त कुंड की खुदाई के दौरान पुरानी सीढ़ियां मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने इसे केवल धार्मिक स्थल न मानकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी संरक्षित किए जाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विशेषज्ञों से स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए। कुंड, आश्रम, समाधि स्थल और आसपास की भूमि का सीमांकन कराकर इसे अवैध कब्जों से सुरक्षित किया जाए। लोगों का मानना है कि यदि अगस्त कुंड का व्यवस्थित विकास, संरक्षण और सौंदर्यीकरण कराया जाए तो यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। प्रशासन की ओर से शुरू हुई खुदाई ने वर्षों से उपेक्षित पड़े इस पौराणिक स्थल को लेकर नई उम्मीद जगा दी है।

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