प्रशासन को पहले से थी जानकारी, फिर भी नहीं टला खूनी संघर्ष, जमीन विवाद में चटकी लाठियां, कई घायल
1 min read बीकापुर, अयोध्या



कोतवाली क्षेत्र स्थित मोतीगंज चौकी क्षेत्र के ग्राम पंचायत जोहन, मजरा चितई मिश्र का पुरवा में जमीन विवाद आखिरकार खूनी संघर्ष में बदल गया।
जो कि पीडित राजेश मिश्रा ने कोतवाली बीकापुर व उपजिलाधिकारी को प्रर्थना पत्र देकर शिकायत किया था
लेकिन प्रशासन की जांच और पुलिस को सूचना देने के बावजूद शाम होते-होते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर लाठी-डंडे चले।
घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, राजेश मिश्रा ने उपजिलाधिकारी व थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि पड़ोसी उनकी भूमि पर जबरन नीव खोदकर अवैध निर्माण कराने की कोशिश कर रहे हैं।
एसडीएम के निर्देश पर लेखपाल मौके पर पहुंचे और कथित रूप से निर्माण न करने की चेतावनी भी दी।
इसके बावजूद दूसरे पक्ष द्वारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि निर्माण शुरू होने की सूचना तत्काल पीआरबी और मोतीगंज चौकी पुलिस को दी गई।
पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान कराए बिना लौट गई।
इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और लाठियां चलने लगीं।
मारपीट में घायल लोग अलग-अलग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों—हैरिंग्टनगंज और बीकापुर—पहुचे, जहां उनका उपचार जारी है।
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना रहा पुलिस और राजस्व पर सवालिया निशान
सबसे बड़ा सवाल…
जब प्रशासन को पहले से विवाद की जानकारी थी, शिकायत एसडीएम व थाना प्रभारी तक पहुंच चुकी थी, लेखपाल मौके का निरीक्षण कर चुका था और पुलिस को भी सूचना दे दी गई थी, तो आखिर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अगर मौके पर सख्ती से निर्माण रुकवाया जाता और विवादित स्थल पर पुलिस की निगरानी रहती, तो क्या यह खूनी संघर्ष टाला नहीं जा सकता था?
वहीं पर बीकापुर थाना प्रभारी देवेंद्र पांडेय ने बताया की द्वितीय पक्ष की तहरीर मिली है जिसमें दो गंभीर घायल हैं दो को मामूली चोटें आई हैं जोकि मामले में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है।
और प्रथम पक्ष राजेश मिश्रा गंभीर रूप से घायल और उनकी पत्नी को मामूली चोटें आई हैं जोकि सीएचसी हैरिंग्टनगंज से अयोध्या रेफर किया गया है जो कि अभी कोई तहरीर नहीं मिली है
अब पूरे मामले में लोगों की नजर पुलिस और राजस्व विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
सवाल सिर्फ दो पक्षों की लड़ाई का नहीं, बल्कि समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप की प्रभावशीलता का भी है।
