August 6, 2026

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तीन साल की बच्ची की हालत गंभीर, परिजनों का आरोप- फर्जी डॉक्टर के इंजेक्शन से बिगड़ी तबीयत दी तहरीर

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सीएचसी की नाक के नीचे झोलाछाप का खेल! मासूम की जिंदगी दांव पर,शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं

तीन साल की बच्ची की हालत गंभीर, परिजनों का आरोप- फर्जी डॉक्टर के इंजेक्शन से बिगड़ी तबीयत

सीएचसी प्रशासन और पुलिस पर संरक्षण देने के आरोप

करनैलगंज गोण्डा

करनैलगंज क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। तीन वर्षीय मासूम बच्ची की हालत गंभीर होने के बावजूद कई अधिकारियों से शिकायत किए जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने अब जिलाधिकारी से एफआईआर दर्ज कराकर आरोपी कथित झोलाछाप डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग की है।
भुलियापुर निवासी ननकू पुत्र जाहिर द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनकी तीन वर्षीय पुत्री रहनुमा को बुखार होने पर वह छतौनी चौराहे पर स्थित एक निजी क्लीनिक पर इलाज के लिए ले गए। वहां कथित डॉक्टर अरविन्द कुमार वर्मा ने इंजेक्शन लगाने और दवा देने के बाद बच्ची को घर भेज दिया। परिजनों का आरोप है कि कुछ ही देर बाद बच्ची के पूरे शरीर पर दाने निकल आए, जो देखते ही देखते बड़े-बड़े छालों में बदल गए और संक्रमण तेजी से फैल गया। पीड़ित के अनुसार जब वह दोबारा कथित डॉक्टर के पास पहुंचे तो उसने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मुस्तफाबाद अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दे दी। हालत बिगड़ने पर बच्ची को पहले मुस्तफाबाद अस्पताल और बाद में बहराइच रेफर किया गया, जहां उसकी हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। परिजनों का कहना है कि बच्ची को दो बार रक्त चढ़ाया जा चुका है और वह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि इलाज में लापरवाही का सवाल उठाने पर कथित डॉक्टर ने अभद्रता करते हुए गाली-गलौज की, क्लीनिक से धक्का देकर बाहर निकाल दिया और दोबारा आने पर हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी।

सीएचसी अधीक्षक व पुलिस की भूमिका पर सवाल, संरक्षण के आरोप

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित व्यक्ति के पास वैध चिकित्सकीय योग्यता नहीं थी, तो वह लंबे समय से खुलेआम क्लीनिक कैसे चला रहा था? स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई झोलाछाप चिकित्सक वर्षों से सक्रिय हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। ऐसे में सीएचसी अधीक्षक की निगरानी व्यवस्था और विभागीय जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि 29 जुलाई से मुख्य चिकित्साधिकारी, पुलिस अधीक्षक, कोतवाली करनैलगंज, भंभुआ चौकी, क्षेत्राधिकारी तथा मुख्यमंत्री पोर्टल तक शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इससे स्थानीय लोगों में यह चर्चा है कि आखिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही और क्या कथित झोलाछाप को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी से आरोपी के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी व न्याय दिलाने की मांग की है। वहीं स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा क्षेत्र में संचालित सभी अवैध क्लीनिकों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की मांग की है।

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