राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी से मुक्ति हेतु आरटीई एक्ट में संशोधन की माँग सांसद को सौंपा ज्ञापन
1 min readबांदा
` अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आवाहन पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में जिला अध्यक्ष पंकज सिंह के नेतृत्व में आज माननीय सांसद श्रीमती कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल, लोकसभा सदस्य को संबोधित ज्ञापन सांसद प्रतिनिधि/कार्यालय प्रमुख को सौंपकर टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त कराने तथा इसके लिए आरटीई एक्ट में आवश्यक संशोधन कराने की माँग की। अचानक आवश्यक कार्य आ जाने से बाहर होने के कारण फोन से वार्ता करते हुए सांसद महोदया ने आश्वासन दिया कि मैं शिक्षकों की आवाज को माननीय प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सामने रखूंगी।
डॉ शिव प्रकाश सिंह मण्डल अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बाद में निर्धारित पात्रता मानदण्डों को भूतलक्षी प्रभाव से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जबकि ये शिक्षक वर्षों से शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देश एवं प्रदेश के उन लाखों शिक्षकों में चिंता व्याप्त है, जिनकी नियुक्ति टीईटी लागू होने से पूर्व तत्कालीन नियमों एवं निर्धारित योग्यताओं के आधार पर विधिवत हुई थी। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से अनुरोध किया कि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा-अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा के लिए संसद के आगामी मानसून सत्र में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाने हेतु भारत सरकार के समक्ष प्रभावी पहल करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेगी।
ज्ञापन कार्यक्रम में जिला एवं ब्लॉक के पदाधिकारी उपस्थित रहे।


