भाजपा सरकार पर लगाए महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की उपेक्षा और पीडीए समाज के उत्पीड़न के आरोप, 2027 में सत्ता परिवर्तन का किया आह्वान
1 min readविश्वकर्मा शिल्पकार महासम्मेलन में गरजे रामआसरे विश्वकर्मा
अतर्रा बांदा

जनपद के रघुनाथ भवन, रामलीला मैदान अतर्रा में रविवार को आयोजित विश्वकर्मा शिल्पकार महासम्मेलन राजनीतिक रूप से चर्चा का केंद्र रहा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि देश व प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी लगातार बढ़ रही है।
‘दो करोड़ रोजगार का वादा निकला जुमला’
रामआसरे विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा हर वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
किसानों और कुटीर उद्योगों की अनदेखी का आरोप
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ। साथ ही आरोप लगाया कि कुटीर एवं लघु उद्योगों के कमजोर होने से गरीब, मजदूर और कारीगर वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
पीडीए समाज के उत्पीड़न का लगाया आरोप
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समाज पर अत्याचार बढ़े हैं तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि सरकार इन वर्गों को न्याय दिलाने में विफल रही है।
विश्वकर्मा समाज के मुद्दे भी उठाए
रामआसरे विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार में विश्वकर्मा समाज के हित में लिए गए कई निर्णय वर्तमान सरकार ने समाप्त कर दिए। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा समाज के युवाओं को बेहतर अवसर और सम्मानजनक रोजगार मिलना चाहिए।
2027 में बदलाव की अपील
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे किसानों, युवाओं, मजदूरों और पीडीए समाज के हितों की बेहतर रक्षा हो सकेगी।
500 से अधिक लोगों की रही मौजूदगी
महासम्मेलन में सांसद कृष्णा पटेल, पूर्व मंत्री शिवशंकर पटेल, रामबाबू विश्वकर्मा, धीरेंद्र विश्वकर्मा, रमेश विश्वकर्मा, अनिल विश्वकर्मा, महेश विश्वकर्मा, डॉ. मधुसूदन कुशवाहा, किरण वर्मा, मौसमी कोटार्य, विवेक बिंद, दिनेश अनुरागी, सुमन दिवाकर, भारत लाल दिवाकर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

