संपूर्ण समाधान दिवस से पहले सजी मिल्कीपुर तहसील, विकास या दिखावा, कर्मचारियों से चंदा वसूली की चर्चा भी तेज
1 min readमिल्कीपुर अयोध्या।
जनपद की मिल्कीपुर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस इस बार प्रशासनिक व्यवस्थाओं से अधिक तहसील परिसर की साज-सज्जा को लेकर चर्चा में है। जिलाधिकारी के प्रस्तावित आगमन से पहले पूरे तहसील परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-रोगन, साफ-सफाई, टेंट, बैठक व्यवस्था और अन्य तैयारियों ने पहली बार तहसील को अलग स्वरूप दिया, जिससे आने वाले फरियादियों और स्थानीय लोगों का ध्यान आकर्षित हुआ। हालांकि इस बदली हुई तस्वीर के साथ कई सवाल भी उठने लगे हैं। आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और सामाजिक लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि क्या यह बदलाव वास्तव में प्रशासनिक सुधार का संकेत है या केवल उच्च अधिकारियों के दौरे तक सीमित औपचारिक तैयारी। स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील परिसर की साज-सज्जा स्वागत योग्य है, लेकिन इससे अधिक आवश्यकता वर्षों से लंबित राजस्व और भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण की है। उनका आरोप है कि पैमाइश, नामांतरण, कब्जा विवाद और अन्य राजस्व मामलों में आज भी लोगों को बार-बार तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं और शिकायतों का समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है।अधिवक्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों का भी मानना है कि यदि समाधान दिवस का उद्देश्य जनता को त्वरित न्याय और राहत देना है, तो प्राथमिकता व्यवस्थाओं की बजाय शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण को मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि केवल बाहरी साज-सज्जा से प्रशासन की कार्यप्रणाली का आकलन नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि समाधान दिवस में आने वाले फरियादियों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका दावा है कि व्यवस्थाओं में सुधार के साथ-साथ शिकायतों के शीघ्र निस्तारण के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस बीच तहसील परिसर की सजावट को लेकर एक और चर्चा सामने आई है। सूत्रों के हवाले से यह बात कही जा रही है कि सजावट के लिए तहसील कर्मचारियों से चंदा लिया गया है। हालांकि इस संबंध में किसी सक्षम अधिकारी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही कोई लिखित शिकायत सार्वजनिक रूप से सामने आई है। ऐसे में इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मिल्कीपुर तहसील में दिखाई दे रहा यह बदलाव केवल वीआईपी दौरे तक सीमित रहेगा, या फिर आम जनता को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और पारदर्शी प्रशासन के रूप में वास्तविक परिवर्तन भी देखने को मिलेगा। इसका जवाब आने वाले दिनों में शिकायतों के निस्तारण और प्रशासनिक कार्यशैली से ही स्पष्ट होगा। सूत्र

