आस्था का सम्मान हो, व्यक्ति विशेष के कृत्य का दोष पूरे समाज या संगठन पर न मढ़ा जाए :- रजनीकांत श्रीवास्तव
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वाराणसी।

भारतीय जनता पार्टी, एनजीओ प्रकोष्ठ, काशी प्रांत के प्रांत सहसंयोजक रजनीकांत श्रीवास्तव ने जारी एक बयान में कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, मर्यादा, संस्कृति और राष्ट्र चेतना के प्रतीक हैं। श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर सदियों के संघर्ष, संतों के तप, कार सेवकों लाखों कार्यकर्ताओं के समर्पण और करोड़ों रामभक्तों की अटूट श्रद्धा का परिणाम है। इसे किसी एक व्यक्ति, दल या संगठन की उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में यदि किसी व्यक्ति पर कोई आरोप है या उसने कोई अनुचित कार्य किया है, तो उसकी जवाबदेही उसी व्यक्ति की होनी चाहिए। किसी एक या कुछ व्यक्तियों के कथित कृत्यों के आधार पर पूरे संगठन, विचारधारा या लाखों कार्यकर्ताओं पर प्रश्नचिह्न लगाना न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
रजनीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ लोग, जिनका श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लंबे संघर्ष से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा, आज इस विषय पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का दायित्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में सभी विषयों पर समान संवेदनशीलता अपेक्षित है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या ऐसे नेताओं ने देश के अन्य महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक विषयों पर भी समान मुखरता दिखाई है। क्या ? ऐसे मुद्दों पर भी समान गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार और संवाद होना चाहिए। उन्होंने सभी सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से आत्ममंथन करने और समाज में सौहार्द, मर्यादा तथा सकारात्मक विमर्श को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
अंत में रजनीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और उन्हें पूर्ण विश्वास है कि प्रदेश की जनता भविष्य में भी राष्ट्रहित, विकास, सांस्कृतिक विरासत और सुशासन को ध्यान में रखते हुए अपना जनादेश देगी।
