चोरों ने एक रात में तीन घर किये साफ, फिर भी चोर पुलिस की पकड़ से दूर
1 min readहीरापुर कमियार में लाखों के जेवर और नकदी चोरी के बाद सवालों के घेरे में रात्रि गश्त, वारदात के बाद जांच तक सिमटी पुलिस की कार्रवाई
कर्नलगंज (गोंडा)।
हीरापुर कमियार के चौहानन पुरवा में एक ही रात तीन घरों में हुई बड़ी चोरी ने कोतवाली पुलिस की रात्रि गश्त और अपराध नियंत्रण की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत के रास्ते घरों में घुसकर चोर लाखों रुपये के जेवरात और नकदी समेट ले गए, लेकिन घटना के बाद कई दिन बीतने के बावजूद पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। तीन घरों को एक साथ निशाना बनाए जाने से ग्रामीणों में दहशत है और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
बीते 11/12 अगस्त की रात देवपाल सिंह, बलजीत सिंह और ग्राम प्रधान पंकज सिंह के घरों में चोरी हुई थी। देवपाल सिंह ने करीब 25 लाख रुपये के जेवर और ढाई लाख रुपये नकदी, जबकि बलजीत सिंह ने करीब 25 लाख रुपये के जेवर और डेढ़ लाख रुपये नकदी चोरी होने और ग्राम प्रधान के घर से भी बक्सों के ताले तोड़कर जेवरात और नगदी चोरी किए जाने की बात तहरीर में कही है। यानी तीनों घरों से हुई चोरी में पीड़ितों ने करीब 50 लाख रुपये से अधिक के जेवर और चार लाख रुपये से अधिक नकदी चोरी होने का दावा किया है।
चोरों के लिए खुला मैदान, पुलिस की गश्त कहां थी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब चोर एक ही गांव में लगातार तीन घरों में दाखिल होकर ताले तोड़ रहे थे, तब पुलिस की रात्रि गश्त कहां थी? क्या संवेदनशील गांवों और चोरी की आशंका वाले इलाकों में पुलिस की नियमित निगरानी नहीं थी? यदि गश्त थी तो अपराधियों को एक के बाद एक तीन घरों को निशाना बनाने का मौका कैसे मिला?ग्रामीणों का कहना है कि वारदात के बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है, जांच करती है और कार्रवाई का भरोसा देती है, लेकिन असली सवाल चोरों की गिरफ्तारी और चोरी गए सामान की बरामदगी का है। पुरानी चोरी की घटनाओं के लंबित रहने के बीच एक ही रात तीन वारदातें पुलिस की चुनौती को और गंभीर बनाती हैं।
जांच की औपचारिकता या जल्द होगा खुलासा?
पुलिस का कहना है कि घटनाओं की जांच की जा रही है और चोरों की पहचान के प्रयास जारी हैं और खुलासे के लिए टीम गठित की गई है। लेकिन पीड़ितों के लिए सिर्फ जांच नहीं, परिणाम जरूरी है। पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि घटना के समय इलाके में रात्रि गश्त किस स्तर पर थी, संदिग्धों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए गए और चोरी के माल की बरामदगी के लिए अब तक क्या प्रगति हुई है। एक ही रात तीन घरों में चोरी के बाद भी यदि अपराधियों तक पुलिस नहीं पहुंच पाती है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर अपराधियों में पुलिस का भय क्यों नहीं है? अब निगाहें पुलिस के अगले कदम पर हैं। ग्रामीणों को आश्वासन नहीं, चोरों की गिरफ्तारी, चोरी के माल की बरामदगी और क्षेत्र में प्रभावी रात्रि गश्त चाहिए।

