एंटी करप्शन बोर्ड ऑफ इंडिया ने उठाई आवाज, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से की 5 बड़ी मांगें
1 min readअयोध्या/नई दिल्ली:
बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण को लेकर ‘एंटी करप्शन बोर्ड ऑफ इंडिया’ ने कड़ा रुख अपनाया है। एंटी करप्शन बोर्ड आफ इंडिया के कार्यालय सचिव रवि शुक्ला ने देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री को एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ-साथ पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की है। कार्यालय सचिव रवि शुक्ला द्वारा भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बिहार राज्य के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17 जून 2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की घटना से आम जनता में गहरी चिंता और भारी आक्रोश व्याप्त है।
विधि सम्मत प्रक्रिया पर उठाए सवाल पत्र के माध्यम से देश की कानून व्यवस्था और विधिक प्रक्रिया को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर कोई अपराध या आरोप था, तो उसे कानून के दायरे में रहकर गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए था। यदि आरोपी के पास हथियार होने की सूचना भी थी, तब भी कानूनी प्रक्रिया के तहत आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी का प्रयास पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसी घटनाओं से किसी भी परिवार को वह अपूरणीय क्षति होती है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
हर्ष का विषय यह है कि बिहार के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा इस पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। रवि शुक्ला ने इसे सरकार का एक सराहनीय और पारदर्शी कदम बताया है।
पीड़ित परिवार के लिए रखी गई ‘5 प्रमुख मांगें’
एंटी करप्शन बोर्ड ऑफ इंडिया ने भरत तिवारी के मामले में सरकार के सामने मुख्य रूप से 5 मांगें रखी हैं।
5 प्रमुख मांगें:
1.भरत तिवारी को शहीद का दर्जा।
2.परिवार को सरकार दे 1 करोड़ रुपये।
3.आजीविका के लिए परिवार में सरकारी नौकरी।
4.आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड नही बर्खास्त किया जाय।
5.आरोपी पुलिस वालों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाय।
पारदर्शिता और न्याय की अपील। रवि शुक्ला ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से विनम्र अनुरोध किया है कि इस गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों व अधिकारियों को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और आम जनता का देश की कानून एवं न्याय व्यवस्था पर अटूट विश्वास बना रहे।

