राजस्व विभाग द्वारा की गई पैमाइश की निशानी उखाड़कर खेत पर कब्जे का आरोप
1 min readराजस्व विभाग द्वारा लगाई गई पैमाइश की निशानी उखाड़कर खेत पर कब्जे का आरोप, पीड़िता ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार
गोंडा।


जिले के कटरा बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम देवापसिया के मजरा नये पुरवा में भूमि विवाद का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। गांव की निवासिनी शांति सिंह पत्नी भुलावन ने जिलाधिकारी गोंडा को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश कर लगाए गए पत्थर को विपक्षियों ने उखाड़कर फेंक दिया और उनके खेत पर जबरन कब्जा कर लिया। साथ ही विरोध करने पर गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी भी दी गई।
पीड़िता शांति सिंह के अनुसार, बीते 9 मई 2026 को राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में ग्राम देवापसिया के मजरा नये पुरवा स्थित उनके खेत की पैमाइश कर सीमांकन किया था। सीमांकन के बाद राजस्व टीम द्वारा खेत की सीमा निर्धारित करने के लिए पत्थर भी लगवाया गया था, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। आरोप है कि 25 मई 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे गांव के ही कुछ लोगों ने उक्त सीमांकन पत्थर को उखाड़कर फेंक दिया और खेत को जोतकर उस पर कब्जा कर लिया। प्रार्थना पत्र में बच्चालाल, मन्नु, श्याम तथा बब्बू समेत कई लोगों के नाम आरोपित किए गए हैं। पीड़िता का कहना है कि जब वह और उसका पुत्र खेत पर पहुंची तथा इसका विरोध किया तो आरोपितों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, गांव से उजाड़ देने जैसी धमकियां भी दी गईं। पीड़िता ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो कोई अप्रिय घटना घट सकती है। शांति सिंह ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए आरोपितों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने तथा उनकी भूमि पर किए गए कथित कब्जे को हटवाने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा प्रदान किए जाने की भी गुहार लगाई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राजस्व विभाग द्वारा भूमि विवादों के निस्तारण के लिए लगातार पैमाइश और सीमांकन की कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सीमांकन के बाद लगाए गए पत्थरों को उखाड़ने और भूमि पर कब्जा करने के आरोप प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती माने जा रहे हैं।अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी स्तर से इस प्रकरण में क्या कार्रवाई की जाती है और पीड़िता को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल मामला चर्चा का विषय बना हुआ है तथा स्थानीय ग्रामीण प्रशासनिक हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
