May 26, 2026

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‘गड्ढा घोटाला’ जांच पर उठे सवाल, जांच टीम पर ही पक्षपात के आरोप

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सुल्तानपुर में ‘गड्ढा घोटाला’ जांच पर उठे सवाल, जांच टीम पर ही पक्षपात के आरोप

वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों के घोटाले का आरोप शिकायतकर्ता ने राजस्व विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग की
सुल्तानपुर।

जनपद में वृक्षारोपण के नाम पर खोदे गए कथित “गड्ढा घोटाले” की जांच रिपोर्ट अब तक जिलाधिकारी को न सौंपे जाने पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मामले में जांच टीम की निष्पक्षता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता संतराम ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने करीबियों एवं अधीनस्थों को बचाने में जुटे हुए हैं और “- सेटिंग गेटिंग के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट 14 मई तक जिलाधिकारी को सौंपनी थी, लेकिन अब तक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि जांच टीम में शामिल कुछ अधिकारी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से बच रहे हैं। विभागीय दबाव की चर्चा भी सामने आ रही है।
शिकायतकर्ता संतराम का आरोप है कि जिन वनकर्मियों पर अनियमितता के आरोप लगे हैं, उन्हीं क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों को जांच टीम में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि “चोर-चोर मौसेरे भाई” वाली कहावत इस मामले में सच साबित हो रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पिछले वर्षों में जिन स्थानों पर वृक्षारोपण के नाम पर सरकारी धन निकाला गया, वहां यदि राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर जांच करें तो एक भी पेड़ नहीं मिलेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से स्थान और नाम बदल-बदलकर वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि वन क्षेत्र अधिकारियों और वनकर्मियों के करीबी लोगों के खातों में विभागीय धनराशि भेजी गई।
मामला धनपतगंज, कूरेभार, कुड़वार और दुबेपुर ब्लॉक क्षेत्रों से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां हजारों गड्ढे केवल कागजों पर खोदे जाने के आरोप लगे हैं। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच शुरू हुई थी।
सबसे बड़ा सवाल जांच टीम को लेकर उठ रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच में शामिल कुछ बीट प्रभारियों पर स्वयं आरोप हैं, ऐसे में जांच की निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है। सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में कई शिकायतों की पुष्टि भी हुई है, लेकिन अंतिम रिपोर्ट अब तक अधर में लटकी हुई है।
चर्चा यह भी है कि कुछ अधिकारियों पर यह कहकर दबाव बनाया जा रहा है कि “ऐसा पूरे प्रदेश में होता है”, जबकि कुछ कर्मचारी बिना निष्पक्ष जांच के हस्ताक्षर करने से इंकार कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता संतराम ने जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह से राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ईमानदारी से जांच हुई तो पूरे घोटाले का पर्दाफाश हो जाएगा और इसमें शामिल अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की रिकवरी भी होनी चाहिए।
अब जनपद में यह चर्चा तेज है कि क्या करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले में दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा। जनता को जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की उम्मीद है।

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