जहां तैनाती, वहीं उम्मीद बनकर पहुंचे हेड कांस्टेबल कैसर अब्बास रिजवी
1 min read“वर्दी में फरिश्ता”: जहां तैनाती, वहीं उम्मीद बनकर पहुंचे हेड कांस्टेबल कैसर अब्बास रिजवी
सुलतानपुर।

पुलिस की वर्दी अक्सर सख्ती और कानून की पहचान मानी जाती है, लेकिन हेड कांस्टेबल कैसर अब्बास रिजवी ने इस वर्दी को इंसानियत, करुणा और सेवा का प्रतीक बना दिया है। धम्मौर और बंधुआ कला में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने जो मिसाल कायम की, वही सिलसिला अब बल्दीराय में भी जारी है।
रिजवी के लिए ड्यूटी सिर्फ थाने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने गरीबों के घरों में राशन पहुंचाया, ठंड में जरूरतमंदों को कपड़े दिए और कई बार रक्तदान कर अनजान लोगों की जिंदगी बचाने का काम किया। उनकी यही संवेदनशीलता उन्हें आम पुलिसकर्मियों से अलग पहचान दिलाती है।
ग्रामीणों की आंखें आज भी नम हो जाती हैं जब वे उन पलों को याद करते हैं, जब संकट की घड़ी में रिजवी बिना बुलाए मदद के लिए पहुंच जाते थे। किसी के घर चूल्हा बुझा हो या परिवार का कोई सदस्य जिंदगी और मौत से जूझ रहा हो—हर हाल में वह सबसे पहले खड़े नजर आए।
उनका मानना है कि पुलिस की असली ताकत सिर्फ कानून लागू करने में नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों के साथ खड़े होने में है। यही सोच उन्हें ‘वर्दी वाला फरिश्ता’ बना देती है। आज भले ही उनकी तैनाती बल्दीराय थाने में हो, लेकिन धम्मौर और बंधुआ कला के लोगों के दिलों में उनकी जगह आज भी कायम है। लोग गर्व से कहते हैं—
“अगर पुलिस में ऐसे लोग हों, तो वर्दी पर भरोसा अपने आप बढ़ जाता है।”
कैसर अब्बास रिजवी अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि इंसानियत, भरोसे और सेवा की वो कहानी हैं, जो हर दिल को छू जाती है।
