June 5, 2026

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विश्व पर्यावरण दिवस पर पेड़ों की कटान के विरोध में उतरे बांदा के जागरूक नागरिक, मानव श्रृंखला बनाकर दर्ज कराया तीखा विरोध

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बांदा
विश्व पर्यावरण दिवस पर पेड़ों की कटान के विरोध में उतरे बांदा के जागरूक नागरिक, मानव श्रृंखला बनाकर दर्ज कराया तीखा विरोध
रोड से दूर लगे हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी का स्थानीय लोगों ने किया पर्दाफाश।
बांदा जन जंगल पहाड़ बचाओ अभियान के साथियों संग छात्र नेताओं ने दी चेतावनी—पेड़ कटे तो होगा उग्र जन आंदोलन, जिला प्रशासन होगा जिम्मेदार।
बांदा। आज जहाँ पूरा विश्व ‘पर्यावरण दिवस’ मनाकर प्रकृति को बचाने का संकल्प ले रहा है, वहीं दूसरी ओर बांदा में हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की तैयारी की जा रही है। आज गायत्री चौराहा के आगे, कालका चौराहा के पास कई महत्वपूर्ण पेड़ों को काटे जाने की योजना की जानकारी स्थानीय निवासी गुलाब चंद्र कुशवाहा जी द्वारा ‘बांदा जन जंगल पहाड़ बचाओ अभियान’ चलाने वाले साथियों को दी गई।
सूचना मिलते ही पर्यावरण और प्रकृति को बचाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता तत्काल मौके पर पहुँच गए। मौके पर पहुँचे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा ‘पप्पू’, छात्र नेता लव सिन्हा, शैलेंद्र कुमार वर्मा, साजिद अली, सचिन सिंह, लियाकत अली, अरविंद श्रीवास्तव, ताहिर अली और अतुल साहू ने स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर काटे जाने वाले पेड़ों के चारों तरफ एक मजबूत मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाई और जिला प्रशासन के खिलाफ अपना तीखा विरोध दर्ज कराया।
भविष्य में भी न काटे जाएं ये पेड़: आंदोलनकारी
मौके पर मौजूद प्रबुद्ध नागरिकों और छात्र नेताओं ने देखा कि जिन पेड़ों को काटने की तैयारी चल रही है, वे मुख्य रोड से काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में भविष्य में भी किसी विकास कार्य के नाम पर इन पेड़ों को काटना पूरी तरह से अनुचित और पर्यावरण विरोधी कदम है। स्थानीय जनता ने इस कार्रवाई पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
प्रशासन को सीधी चेतावनी
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे साथियों ने जिला प्रशासन को सीधे तौर पर चेताते हुए कहा:
“एक तरफ सरकार पर्यावरण बचाने का बात कह रही है,पर वहीं दूसरी तरफ प हरे-भरे पेड़ों की बलि दी जा रही है। अगर इन पेड़ों को काटा गया, तो बांदा की जनता चुप नहीं बैठेगी। इसके खिलाफ एक बड़ा और जन आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।”
इस मौके पर भारी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद रहे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को दोहराते हुए हर हाल में पेड़ों की रक्षा करने की बात कही।

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