श्री मद्भागवत कथा में अक्रूर जी का प्रसंग और रुक्मणी विवाह का वर्णन
1 min readधौलपुर राजस्थान।
भक्ति रस में डूबा धौलपुर

महाराज श्री ने सुनाया अक्रूर जी का प्रसंग और रुक्मणी विवाह का वर्णन
धौलपुर।
राजस्थान के धौलपुर मचकुंड रोड परशुराम सेवा सदन में आयोजित ‘श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं एकादशी उद्यापन’ के छठे दिन शनिवार को कथा व्यास स्वामी श्री मानस प्रपन्न भानुदेवाचार्य जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) ने श्रद्धालुओं को भक्ति के रस में सराबोर किया। इस धार्मिक महोत्सव का आयोजन परीक्षित श्रीमती कुसुम एवं सतीश शर्मा द्वारा कराया जा रहा है।
व्यासपीठ से कथा सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा कि एक सुखी परिवार के लिए आपसी सम्मान बहुत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाँ पत्नियों को पतिव्रत धर्म का पालन करना चाहिए, वहीं पतियों का भी यह परम कर्तव्य है कि वे अपनी पत्नियों का पूरा सम्मान करें।
कथा के दौरान महाराज श्री ने अक्रूर जी के प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने गोवर्धन जतीपुरा परिक्रमा मार्ग की महिमा बताते हुए श्रीनाथ जी, श्री गोपीनाथ जी, मदन मोहन जी और बिहारी जी के विग्रहों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आँखों की असली शोभा भगवान के दर्शन में ही है। इस अवसर पर महाराज श्री ने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी— “हाय रे मेरी अखियाँ लड़ गईं, बांके बिहारी से, कुंज बिहारी से मेरी अखियाँ लड़ गईं”— जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे।
अध्यात्म की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक आनंद तभी है जब उसे भगवान से प्रेम हो जाए। उन्होंने भक्तों को ईर्ष्या, कपट, छल और अभिमान से दूर रहने की सलाह दी, क्योंकि भगवान को केवल सरल हृदय ही पसंद आता है। कथा के अंत में श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध और श्री रुक्मणी-कृष्ण विवाह के प्रसंग का बड़े ही सुंदर ढंग से वर्णन किया गया। संगीतमय श्रीमद् भागवत रस महोत्सव के अवसर पर श्री मति उर्मिला शर्मा, रामअवतार शर्मा ,विशंभर दयाल शर्मा, कुशल शर्मा, निर्मला शर्मा, राजेन्द्र शर्मा, संजय, हरेंद्र और
इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। कथा का समापन रविवार, 28 फरवरी को होगा।
ब्यूरो विजय शर्मा
