February 11, 2026

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संत शिरोमणि रविदास जी की 649 वीं जयंती बड़े धूमधाम के साथ मनाई गई

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बांदा

जनपद मे संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 649वीं जयंती के अवसर पर रविदास रामायण का पाठन पठन, 12 घंटे गायन किया गया, और उनके जीवन चरित्र पर चर्चा की गई,तत्पश्चात हवन पूजा, और कन्या भोज का आयोजन भी करवाया गया ।
इस मौके पर श्री राजकरन वर्मा ग्राम प्रधान मवई बुजुर्ग,श्री सुखलाल बौद्ध पूर्व सदस्य ग्राम पंचायत मवई बुजुर्ग, श्री संतोष वर्मा पूर्व सदस्य ग्राम पंचायत मवई बुजुर्ग एवं श्री भोला प्रसाद वर्मा पूर्व सदस्य ग्राम पंचायत मवई बुजुर्ग, प्रेम कुमार वर्मा, अशोक उर्फ राजा भैया वर्मा, अमित कुमार वर्मा, दीपक कुमार वर्मा उर्फ दीपू,
बबलू वर्मा ,श्री शिवाधार वर्मा, श्री छेदिंया वर्मा, अनिल वर्मा, राजकुमार वर्मा, श्री रमेश वर्मा सहित समस्त ग्राम वासी व सैकड़ों लोगों ने इस कार्यक्रम में शामिल रहे ‌

वही सुखलाल बौद्ध जी ने संत शिरोमणि रविदास कि के बारे बताते हुए कहा कि जगत गुरु संत शिरोमणि रविदास जी
संत रविदास जी तथागत बुद्ध को अपना गुरु मानते थे ।
तथागत बुद्ध के चारित्रकार है संत रविदास जी।
संत रविदास जी ने अपने दोहे में कहा है कि ।
“अजामिल ,गज, गणिका ,तारी
काटी कुंजीर पाश
ऐसे गुरमते मुक्त किये तू क्यों न तरे रैदास!”
अथार्थ:- अजामिल यानि अंगुलिमाल,हे तथागत तुमने अंगुलिमाल जैसे हिंस्र आदमी को इंसान बनाया,
हे तथागत तुमने गज यानि पागल हाथी को शांत किया उसके भी मार्गदाता बन गए है, तथागत गणिका यानि आम्रपाली के आप मार्गदाता बन कर उसका घमंड को चूर चूर करके उसे भिक्खु संघ में लिया।तुम इन सभी के मार्गदाता हो गए ,तो तुम्हारे इस रैदास के तुम गुरु नहीं हो ?
संत रविदास बुद्ध को अपना गुरु घोषित किये थे ।
संत रविदास और संत कबीर अपने दोहे में तथागत बुद्ध को अपना गुरु घोषित किए थे ।ब्राम्हण इन बातों को छुपाते है । ताकि हमारी प्रेरणा सही सामने न आये। ब्राम्हण इसलिए झूठा बताते है कि यह साधु ,संत भक्ति कर रहे थे।अगर यह भक्ति का आंदोलन था तो उनकी हत्याएं क्यों की गयी?
हमारा यह सिद्धान्त है कि
संतो का आंदोलन भक्ति का आंदोलन नहीं था बल्कि मानव मुक्ति का आंदोलन था !

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