राजाखेड़ा क्षेत्र में मुआवजे को लेकर किसानों का विरोध, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
1 min read
धौलपुर।
राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के गन्हेदी, महरिया, हनुमानपुरा, हावरी, ढाडेकापूरा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान और ग्रामीण महिलाएं सोमवार को धौलपुर कचहरी परिसर पहुंचे। ग्रामीणों ने ग्रीनफील्ड ग्वालियर–आगरा एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि के मुआवजे को लेकर जिला कलेक्टर के समक्ष विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन अधिग्रहण की जा रही है, लेकिन इसके बदले उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें मात्र चार लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजे की बात कही जा रही है, जबकि सीमावर्ती उत्तर प्रदेश में इसी परियोजना के तहत 12 से 15 लाख रुपये प्रति बीघा तक मुआवजा दिया जा रहा है। ऐसे में एक ही मिट्टी और एक ही परियोजना के बावजूद दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनकी जमीन का सही और न्यायसंगत मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे एक्सप्रेसवे निर्माण का विरोध करेंगे और सड़क नहीं बनने देंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि मुआवजे को लेकर उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार समाधान का प्रयास किया जाएगा।
एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, लेकिन मुआवजा बना रोड़ा
गौरतलब है कि ग्वालियर–आगरा ग्रीन एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आवागमन काफी सुगम हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से दिल्ली, आगरा और ग्वालियर के बीच यात्रा का समय घटेगा। वर्तमान में दिल्ली से ग्वालियर की यात्रा में 6 से 7 घंटे का समय लगता है, जो एक्सप्रेसवे के बाद काफी कम हो जाएगा।
इसके अलावा यह ग्रीन एक्सप्रेसवे इटावा में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, लखनऊ में आगरा एक्सप्रेसवे और कोटा में दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिससे देशभर में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।
हालांकि, स्थानीय किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने की स्थिति में यह महत्वाकांक्षी परियोजना विरोध की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो

