निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक कृष्ण सुदामा मिलन पंडित अशोक दत्त सैंथिया जी महाराज
1 min readधौलपुर राजस्थान।
निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक कृष्ण सुदामा मिलन पंडित अशोक दत्त सैंथिया जी महाराज।
अचलेश्वर महादेव मंदिर में संगीत मय श्री मद भागवत कथा का भावपूर्ण विश्राम: सुदामा चरित्र सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
धौलपुर।
चंबल किनारे स्थित प्रसिद्ध श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन भक्ति की अविरल धारा बही। कथा के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने भगवान की लीलाओं का श्रवण किया।
कथा के अंतिम दिन प्रख्यात कथा व्यास पंडित अशोक दत्त सैंथिया जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की अटूट और निस्वार्थ मित्रता का प्रसंग सुनाया। महाराज जी ने मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारिका पहुंचे, तो भगवान ने नंगे पैर दौड़कर अपने मित्र का स्वागत किया ”सच्ची मित्रता में अमीरी-गरीबी या ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता। कृष्ण ने सुदामा द्वारा भेंट किए गए तीन मुट्ठी चावल के बदले उन्हें दो लोकों का ऐश्वर्य प्रदान कर दिया।”
कथा व्यास अशोक दत्त सैंथिया जी ने संदेश दिया कि ईश्वर केवल प्रेम और समर्पण के भूखे हैं। सुदामा चरित्र सुनकर पांडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। यह भव्य आयोजन श्री बाबा सेवकदास जी की बरसी के पावन उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है। कथा के विश्राम के साथ ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार देखने को मिला। यद्यपि कथा का वाचन मंगल वार को संपन्न हो गया है, लेकिन मुख्य धार्मिक अनुष्ठान कल, 7 जनवरी को आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री श्री 1008 श्री द्वारिकादास प्रभु जी, एवं श्री अचलेश्वर महादेव जी के महंत श्री 108 मनोज दास बाबा जी महाराज, रामविलास पुजारी, सेवक रामप्रकाश, पंडित अरुण कांत लवानिया, पं. आकाश एवं समस्त भक्त मंडल का विशेष सहयोग रहा। महंत मनोज दास बाबा ने सभी धर्मप्रेमियों से कल होने वाले भंडारे में सम्मिलित होने का आह्वान किया है।
ब्यूरो विजय शर्मा

