प्रेम ही संसार का सार है श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन उमड़ा जनसैलाब
1 min readधौलपुर राजस्थान।
प्रेम ही संसार का सार है: श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन उमड़ा जनसैलाब
धौलपुर के राधा बिहारी मंदिर में आचार्य योगेश कृष्ण जी महाराज ने सुनाया सुदामा चरित्र का भावपूर्ण प्रसंग
धौलपुर। पैलेस रोड स्थित प्राचीन राधा बिहारी मंदिर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र और श्री कृष्ण-सुदामा मिलन के प्रसंग ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता एक मिसाल
कथा व्यास आचार्य योगेश कृष्ण जी महाराज ने अंतिम दिन की महिमा बताते हुए कहा कि “प्रेम ही इस संसार का एकमात्र सार है।” उन्होंने सुदामा के चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता और अटूट श्रद्धा की व्याख्या की। महाराज जी ने कहा कि मित्रता हो तो श्री कृष्ण और सुदामा जैसी, जिसमें धन-दौलत और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता।
भजनों पर जमकर थिरके श्रोता
कथा के दौरान महाराज जी द्वारा गाए गए मधुर भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सुंदर भजनों की धुन पर पांडाल में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रोताओं ने भावमग्न होकर नृत्य किया। पूरा मंदिर परिसर “जय श्री कृष्णा” और “राधे-राधे” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
भारी भीड़ ने लिया धर्म लाभ
कथा के अंतिम दिन धौलपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भारी भीड़ के चलते मंदिर परिसर छोटा पड़ता नज़र आया। आयोजकों ने बताया कि सात दिनों तक चली इस भागवत गंगा में भक्तों ने श्रद्धापूर्वक गोते लगाए। कथा के समापन पर आरती की गई और भक्तों में प्रसाद वितरण किया गया।कथा व्यास आचार्य योगेश कृष्ण जी महाराज ने अंतिम दिन की महिमा का बखान करते हुए कहा कि “प्रेम ही इस संसार का एकमात्र शाश्वत सार है।” उन्होंने सुदामा जी के चरित्र के माध्यम से स्पष्ट किया कि सच्ची मित्रता और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा क्या होती है।महाराज जी ने भावुक स्वर में कहा: ”मित्रता में धन, वैभव और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता। श्री कृष्ण ने नंगे पैर दौड़कर अपने निर्धन सखा सुदामा का स्वागत कर यह सिद्ध किया कि भगवान केवल प्रेम और भाव के भूखे हैं, भौतिक वस्तुओं के नहीं।”
कथा के दौरान जब महाराज जी ने कृष्ण-सुदामा मिलन के मधुर भजनों को अपनी आवाज दी, तो पूरा पांडाल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। सुरीली धुन और ढोलक की थाप पर श्रोता अपनी सुध-बुध खोकर झूमने लगे। “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…” जैसे भजनों पर उपस्थित जनसमूह ने भावमग्न होकर नृत्य किया। पूरा मंदिर परिसर घंटों तक “जय श्री कृष्णा” और “राधे-राधे” के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान रहा। कथा के अंतिम दिन धौलपुर शहर सहित ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भारी भीड़ का आलम यह था कि मंदिर परिसर और पांडाल छोटा पड़ता नज़र आया। बड़ी संख्या में महिलाओं और बुजुर्गों ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ कमाया। कथा की इस अवसर पर संगीता गुप्ता, विजय शर्मा रेखा शर्मा, नीलम शर्मा , सुनीता शिवहरे, रवि शिवहरे ने बताया कि 29/ 12/ 2025 को हवन होगा और हवन के बाद फिर प्रसादी होगी। इस अवसर पर कथा व्यास जी ने सभी भक्त मंडल समिति के सदस्यों को आशीर्वाद प्रदान किया। कथा के इस दौरान भोला गुप्ता राम किशोर पाठक, मनोज चौहान , राजेंद्र राणा, सुनील जगरिया ,उपेंद्र दीक्षित, किशन यादव।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो राजस्थान

