उच्च न्यायालय ने कादीपुर के तहसीलदार वृजेश कुमार सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
1 min readमाननीय उच्च न्यायालय ने कादीपुर के तहसीलदार वृजेश कुमार सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
भ्रष्टाचार में रहे लिप्त रहे अधिकारीयों में मचा हड़कंप
अवमानना संख्या 4493/2024माननीय उच्च न्यायालय का चला चाबूक
तहसीलदार बृजेश कुमार सिंह व 8 अन्य के खिलाफ जारी वारंट
सुलतानपुर
मामला सुल्तानपुर जिले के तहसील कादीपुर के अंतर्गत ग्राम हींगुनगौरा से जुड़ा हुआ है। जहां की रहने वाली विधवा शांति देवी उम्र 75 वर्ष पत्नी स्व. दयाशंकर सिंह के नाम राजस्व अभिलेख में गाटा संख्या 224 रकबा – 3 -12-14 , तीन बिगहा बारह विश्वा चौदहा धुर भूमि राजस्व अभिलेख में अंकित दर्ज रहा,जो उनकी पुस्तैनी कृषि भूमि है जिस पर शान्ति देवी अपना खेती बाड़ी कर भरण-पोषण करती थी। वहीं शान्ति देवी के गांव के जालसाज किस्म के सरजू प्रसाद सिंह पुत्र कांशी नरेश सिंह, ब्रह्मदेव मौर्या,व धर्मराज मौर्या, पुत्र गण रामकुमार मौर्या, ने मिलकर फर्जी तरीके से उक्त अशिक्षित व असहाय शांति देवी से सादे कागज पर लोन दिलाने के बहाने अंगूठा निशान लगवा कर उक्त भूमि का बैनामा 1977 में कर लिया था उक्त बनाने को खारिज (मंसूख) करने का दावा शांति देवी द्वारा मुंसिफ उत्तरी सुल्तानपुर की अदालत में योजित किया गया। जिस पर बैनामे को उक्त न्यायालय द्वारा निरस्त करते हुए शांति देवी के पक्ष में वाद निर्णीत 1979 में किया गया। तत्पश्चात प्रथम अपीलीय न्यायालय में विपक्षी गणों ने उक्त डिग्री के विरुद्ध वाद योजित किया जिसे अपीलीय न्यायालय जनपद सुल्तानपुर में विपक्षी गणो के पक्ष में1984 किया था। और जब इस बारे में जानकारी हुई तो दूसरी अपील मुकदमा संख्या 538/1984 शांति देवी बनाम सरजू प्रसाद सिंह आदि माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ में योजित की गई दोनों पक्षों को सुनकर माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ ने 21 मार्च 1985 को आदेश पारित करते हुए विपक्षी गणों को शांति देवी के उक्त भूमि पर कब्जे में दखल देने से रोका दिया तथा प्रथम अपील न्यायलय सुल्तानपुर के आदेश की क्रियान्वयन व प्रभाव को भी स्थगित कर दिया जिसे तत्कालीन नायब तहसीलदार दियारा ने 1986 में विपक्षी गणों की दाखिल खारिज प्रार्थना पत्र को कार्यवाही को स्थगित करते हुए दाखिल दफ्तर कर दिया उक्त बैनामा माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के आदेश के क्रम में आज भी खारिज है ऐसे में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार करते हुए विपक्षी गणों को लाभ पहुंचाने की नीयत से अपने पद का दुरुपयोग करते हुए तत्कालीन तहसीलदार न्यायिक श्री बृजेश कुमार सिंह ने व विपक्षी गणो के साथ मिलकर कानून के साथ खिलवाड़ किया जो न्याय संगत नहीं था।प्रथम प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और द्वितीय प्रार्थना पत्र बहाल कर दिया जिससे विपक्षी गणों को लाभ प्राप्त हो सके और प्रार्थना पत्र पर दाखिल खारिज नामांतरण व अमल दरामद कर दाखिल दफ्तर आदेश दिनांक 12-03-2024 को कर दिया ।जब भ्रष्टाचार इस पूरे प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय के संज्ञान में आया तो तहसीलदार बृजेश सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश देते हुए जिला अधिकारी को भी फटकार लगाया। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला अधिकारी सुल्तानपुर हर्ष कुमार के द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पीड़ित महिला को न्याय दिलाने में आगे आना चाहिए क्योंकि जब न्यू में ही भ्रष्टाचार हो जाएगा तो आम जनमानस को न्याय कहां से मिल पाएगा जीरो टॉलरेंस नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रहे हैं क्या यही सुशासन व्यवस्था है या पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

